PMAY-G सर्वे में छूटा परिवार दोबारा कैसे जुड़े: पूरा तरीका 2026

अक्टूबर 29, 2026
Written By Ali Akbar

अगर आपके गाँव में PMAY-G का सर्वे हो गया है और उसमें आपके परिवार का नाम नहीं आया है, तो घबराने की ज़रूरत नहीं है — लेकिन चुप बैठने की भी नहीं। PMAY-G सर्वे में छूटा परिवार दोबारा जुड़ सकता है, बशर्ते वह सही रास्ते से, सही समय पर और सही दस्तावेज़ों के साथ अपनी बात दर्ज कराए। इस लेख में हम यही पूरा तरीका आसान भाषा में समझेंगे: पहले यह कैसे पता करें कि नाम सच में छूटा है, फिर Awaas+ सर्वे, ग्राम सभा की दावा-आपत्ति और ब्लॉक कार्यालय के ज़रिए दोबारा जुड़ने के कदम, और वे गलतियाँ जिनसे बचना ज़रूरी है।

एक बात शुरुआत में ही साफ़ कर लें: सर्वे में नाम न आना हमेशा अंतिम फैसला नहीं होता। कई बार नाम सूची में होता है, लेकिन गलत spelling, गलत पंचायत या गलत गाँव चुनने की वजह से दिखाई नहीं देता। कई बार सर्वे ही अधूरा रह गया होता है। और कई बार परिवार वाकई सर्वे से छूट गया होता है — तब उसे जोड़ने की प्रक्रिया अलग होती है। इसलिए पहला कदम हमेशा जाँच का है, शिकायत का नहीं।

PMAY-G सर्वे में छूटा परिवार: पहले यह पुष्टि करें कि नाम सच में छूटा है

शिकायत या दोबारा सर्वे की बात करने से पहले नीचे दी गई जाँच पूरी कर लें। इससे आपका समय बचेगा और आपकी बात कार्यालय में भी ज़्यादा मज़बूत बनेगी।

  • सही पंचायत और गाँव चुनें: एक पंचायत में कई गाँव आते हैं। सूची देखते समय अपना ज़िला, ब्लॉक, ग्राम पंचायत और गाँव — चारों सही चुनें।
  • नाम की अलग-अलग spelling आज़माएँ: सर्वे में नाम कभी-कभी छोटे रूप में या अलग spelling में दर्ज हो जाता है। पिता या पति के नाम से भी खोजकर देखें।
  • रजिस्ट्रेशन नंबर से खोजें: अगर आपके पास पहले के सर्वे या सूची का रजिस्ट्रेशन नंबर है, तो उसी से खोजना सबसे भरोसेमंद तरीका है।
  • पड़ोसियों से तुलना करें: अगर पड़ोस के पात्र परिवारों के नाम सूची में हैं और आपका नहीं है, तो यह इस बात का संकेत है कि आपका मामला दर्ज करने लायक है — लेकिन अकेले यही सबूत नहीं है।
  • पंचायत कार्यालय में पूछें: ग्राम पंचायत सचिव या ग्राम रोज़गार सहायक से पूछें कि आपके परिवार का सर्वे हुआ था या नहीं, और अगर हुआ था तो वह किस स्थिति में है।

अगर इन जाँचों के बाद भी नाम नहीं मिलता, तो मान लें कि आपका परिवार सर्वे से छूट गया है या उसकी जानकारी आगे नहीं बढ़ी है। अब नीचे दिए गए रास्तों पर चलें। PMAY-G लाभार्थी सूची 2026-27 में नाम कैसे देखें, यह लेख सूची देखने के तरीके को विस्तार से समझाता है।

सर्वे में नाम छूटने के 5 आम कारण

कारण समझने से हल चुनना आसान हो जाता है, क्योंकि हर कारण का अगला कदम अलग हो सकता है।

  1. SECC 2011 की पुरानी सूची: PMAY-G की मूल सूची SECC 2011 के आँकड़ों से बनी थी। जो परिवार तब गिने ही नहीं गए, या जिनकी मकान की स्थिति बाद में बदली, वे उस पुरानी सूची में नहीं आ सके। उन्हीं छूटे परिवारों के लिए Awaas+ सर्वे लाया गया।
  2. सर्वे के समय परिवार मौजूद नहीं था: सर्वेक्षक के आने पर परिवार का मुखिया गाँव में नहीं था, या घर बंद मिला, तो जानकारी अधूरी रह गई।
  3. गलत या अधूरी जानकारी: आधार, परिवार के सदस्यों की संख्या, मौजूदा मकान की स्थिति या पते में गलती होने पर फॉर्म आगे की जाँच में अटक सकता है।
  4. परिवार की नई स्थिति: शादी, बँटवारा या अलग रहने की वजह से बना नया परिवार पुरानी सूची में दर्ज नहीं होता। ऐसे परिवारों को नए सिरे से सर्वे में दर्ज होना पड़ता है।
  5. ग्राम सभा में नाम पर आपत्ति या छँटनी: कभी-कभी सर्वे तो हो जाता है, लेकिन ग्राम सभा की जाँच में नाम आगे नहीं बढ़ता। तब दावा-आपत्ति का रास्ता काम आता है, जिसके बारे में आगे बताया गया है।

दोबारा जुड़ने का रास्ता 1: Awaas+ 2024 सर्वे में दर्ज हों

छूटे परिवारों के लिए सबसे सीधा रास्ता Awaas+ 2024 सर्वे है। यह सर्वे उन ग्रामीण परिवारों को जोड़ने के लिए है जो पुरानी सूची में नहीं आ सके थे। इसमें दो तरीके हैं — सेल्फ सर्वे और असिस्टेड सर्वे।

तरीका 1: सेल्फ सर्वे (खुद अपने मोबाइल से)

सरकार ने AwaasPlus 2024 ऐप के ज़रिए सेल्फ सर्वे की सुविधा दी है। इसमें आधार आधारित फेस ऑथेंटिकेशन से पहचान की पुष्टि होती है। सेल्फ सर्वे बनाम असिस्टेड सर्वे में क्या फर्क है, यह जानना इसलिए ज़रूरी है ताकि आप अपनी स्थिति के हिसाब से सही तरीका चुन सकें।

  1. आधिकारिक AwaasPlus 2024 ऐप ही इस्तेमाल करें। ऐप किसी अनजान लिंक या तीसरे पक्ष की वेबसाइट से डाउनलोड न करें — पंचायत या आधिकारिक स्रोत से मिला लिंक ही सुरक्षित है।
  2. ऐप में आधार विवरण से रजिस्टर करें और फेस ऑथेंटिकेशन पूरा करें। यही आपकी ई-केवाईसी है।
  3. परिवार की जानकारी ध्यान से भरें — परिवार के सदस्य, मौजूदा मकान की स्थिति (कच्चा, टूटा हुआ या बेघर), आय का स्तर और सामाजिक-आर्थिक विवरण।
  4. मौजूदा मकान और प्रस्तावित निर्माण स्थल की जियो-टैग वाली तस्वीरें लें। यह कदम ज़रूरी है, क्योंकि इससे स्थान और मकान की हालत साबित होती है।
  5. सब कुछ दोबारा पढ़कर ही सबमिट करें। सबमिट करने के बाद मिली पुष्टि या रेफरेंस नंबर संभालकर रखें — यही आगे पूछताछ में काम आएगा।

तरीका 2: असिस्टेड सर्वे (सर्वेक्षक की मदद से)

अगर आपके पास स्मार्टफोन नहीं है, फेस ऑथेंटिकेशन में दिक्कत आ रही है, या फॉर्म भरने में मदद चाहिए, तो असिस्टेड सर्वे चुनें। इसमें पहले से पंजीकृत सर्वेक्षक उसी ऐप से आपके परिवार की जानकारी दर्ज करता है। आप ग्राम पंचायत कार्यालय, ब्लॉक कार्यालय या नज़दीकी जन सेवा केंद्र (CSC) पर भी जा सकते हैं और वहाँ से अपना सर्वे दर्ज कराने की बात कह सकते हैं।

दोनों तरीकों में एक बात समान है: सर्वे भरना ही मंज़ूरी नहीं है। सर्वे की जानकारी ग्राम सभा की जाँच से गुज़रती है, और पात्र पाए गए परिवार ही स्थायी प्रतीक्षा सूची में जुड़ते हैं। इसलिए फॉर्म भरने के बाद ग्राम सभा की प्रक्रिया पर भी नज़र रखें।

दोबारा जुड़ने का रास्ता 2: ग्राम सभा में दावा-आपत्ति दर्ज करें

अगर आपका सर्वे हो चुका है लेकिन सूची में नाम नहीं आया है, या मसौदा सूची में आपका नाम गलत तरीके से हटा दिया गया है, तो ग्राम सभा की दावा-आपत्ति की खिड़की आपके लिए सबसे अहम है। ग्राम सभा में स्वीकृत और अस्वीकृत परिवारों की सूची पढ़ी जाती है, और इसी दौरान दावे और आपत्तियाँ दर्ज की जाती हैं।

  • ग्राम सभा की तारीख पहले से पता करें: पंचायत कार्यालय से पूछें कि सूची कब पढ़ी जाएगी और दावा-आपत्ति कब तक दर्ज होगी। तारीखें ज़िले और पंचायत के हिसाब से अलग हो सकती हैं, इसलिए व्हाट्सऐप पर फैली तारीख पर भरोसा न करें।
  • लिखित में दावा दें: मौखिक बात से बेहतर है कि आप एक साधारण लिखित आवेदन दें — जिसमें परिवार के मुखिया का नाम, गाँव, सर्वे का रेफरेंस नंबर (अगर हो), और यह साफ़ लिखा हो कि नाम क्यों छूटा है या क्यों जोड़ा जाना चाहिए। आवेदन की एक प्रति अपने पास रखें।
  • सबूत साथ रखें: आधार कार्ड, बैंक पासबुक, मनरेगा जॉब कार्ड और मकान की तस्वीरें साथ ले जाएँ। अगर परिवार में बँटवारा या अलग रहने की स्थिति है, तो वह बात भी साफ़ लिखें।
  • ग्राम सभा के बाद क्या होगा, यह पूछें: दावा-आपत्ति के बाद सूची ज़िला स्तर की अपीलीय समिति के पास जाती है, जो अंतिम प्रतीक्षा सूची तय करती है। इसलिए सिर्फ दावा देना काफी नहीं है — उसके बाद की स्थिति भी पंचायत से पूछते रहें।

PMAY-G सूची पर आपत्ति कैसे दर्ज करें और ग्राम सभा और सोशल ऑडिट की प्रक्रिया — ये दोनों लेख इस चरण को और विस्तार से समझाते हैं।

दोबारा जुड़ने का रास्ता 3: ब्लॉक कार्यालय और शिकायत का रास्ता

अगर पंचायत स्तर पर बात नहीं बन रही है — जैसे सर्वेक्षक सर्वे करने से मना कर रहा है, या आपका दावा बिना कारण खारिज हो गया है — तो अगला कदम ब्लॉक विकास कार्यालय (BDO) है। वहाँ आधार कार्ड और बैंक विवरण के साथ लिखित में अपनी बात रखें और आवेदन की पावती ज़रूर लें। पावती के बिना आगे शिकायत करना मुश्किल हो जाता है।

अगर ब्लॉक स्तर पर भी समाधान नहीं मिलता, तो गलत रिपोर्ट या गलत जानकारी की शिकायत CPGRAMS के ज़रिए दर्ज की जा सकती है। CPGRAMS पर PMAY-G की शिकायत का पूरा तरीका इस प्रक्रिया को कदम-दर-कदम बताता है। शिकायत में हमेशा तथ्य लिखें — तारीख, पंचायत का नाम, सर्वे का रेफरेंस नंबर और पहले दिए गए आवेदनों की प्रतियाँ। भावनात्मक भाषा से ज़्यादा काम साफ़ तथ्य करते हैं।

टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-11-6446 पर भी जानकारी ली जा सकती है, लेकिन हेल्पलाइन से मिली जानकारी को भी अपने पंचायत या ब्लॉक कार्यालय से पुष्टि करके ही अंतिम मानें, क्योंकि ज़मीनी प्रक्रिया ज़िले के हिसाब से बदल सकती है।

पात्रता की बुनियादी जाँच खुद भी कर लें

दोबारा जुड़ने की कोशिश से पहले यह भी समझ लें कि PMAY-G किन परिवारों के लिए है। यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों के उन परिवारों के लिए है जो बेघर हैं या कच्चे या टूटे हुए मकान में रहते हैं। PMAY-G पात्रता गाइड में पूरी शर्तें विस्तार से दी गई हैं, लेकिन कुछ बुनियादी बातें यहाँ भी जान लें:

  • परिवार के पास पहले से पक्का मकान नहीं होना चाहिए।
  • नए नियमों के तहत बहिष्करण की शर्तें पहले की तुलना में कम की गई हैं, और मासिक आय की सीमा बढ़ाकर 15,000 रुपये की गई है — लेकिन यह सीमा और शर्तें समय-समय पर बदल सकती हैं, इसलिए अंतिम पुष्टि पंचायत से ही करें।
  • सरकारी नौकरी, आयकर देने, चार पहिया वाहन, या तय सीमा से ज़्यादा Kisan Credit Card जैसी स्थितियाँ बहिष्करण का कारण बन सकती हैं। यह सूची पूरी नहीं है — पूरी सूची पंचायत या ब्लॉक कार्यालय से लें।
  • सहायता राशि सामान्य क्षेत्रों में 1.20 लाख रुपये और पहाड़ी/दुर्गम क्षेत्रों में 1.30 लाख रुपये है। यह राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में किस्तों में आती है, किसी बिचौलिए के हाथ में नहीं।

अगर आप किसी बहिष्करण शर्त में आते हैं, तो सर्वे भरने से पहले ही पंचायत से पूछ लें कि आपकी स्थिति में क्या नियम लागू होगा। गलत जानकारी देकर सर्वे भरना बाद में नाम हटने और परेशानी का कारण बन सकता है।

सर्वे के बाद क्या होता है — पूरा क्रम

बहुत से परिवार यह सोचकर निराश हो जाते हैं कि सर्वे भरते ही मकान की मंज़ूरी मिल जाएगी। असल क्रम इससे लंबा है, और इसे समझना ज़रूरी है ताकि गलत उम्मीद न बने:

  1. सर्वे दर्ज होता है — सेल्फ सर्वे या असिस्टेड सर्वे के ज़रिए।
  2. ग्राम सभा में जाँच होती है — स्वीकृत और अस्वीकृत परिवारों की सूची सामने आती है।
  3. दावा-आपत्ति की खिड़की खुलती है — छूटे या गलत तरीके से हटाए गए परिवार अपनी बात दर्ज करा सकते हैं।
  4. ज़िला स्तरीय अपीलीय समिति अंतिम सूची तय करती है — इसी के बाद स्थायी प्रतीक्षा सूची बनती है।
  5. पंचायत को सालाना लक्ष्य मिलता है — मंज़ूरी उसी साल के लक्ष्य के हिसाब से, प्राथमिकता क्रम में दी जाती है। इसलिए सूची में नाम आना और मकान की मंज़ूरी मिलना दो अलग चरण हैं।

इसका मतलब यह है कि PMAY-G सर्वे में छूटा परिवार अगर सर्वे और दावा-आपत्ति के चरण सही तरीके से पूरे कर लेता है, तो वह प्रतीक्षा सूची में आ सकता है — लेकिन मंज़ूरी कब मिलेगी, यह पंचायत के लक्ष्य और प्राथमिकता पर निर्भर करेगा। कोई भी व्यक्ति अगर यह दावा करे कि वह पैसे लेकर तुरंत मंज़ूरी दिला देगा, तो उससे सावधान रहें।

दस्तावेज़ों की तैयारी: पहले से तैयार रखें

सर्वे या दावा-आपत्ति के समय दस्तावेज़ माँगे जाने पर भागदौड़ न करनी पड़े, इसलिए ये कागज़ पहले से तैयार रखें:

  • परिवार के मुखिया और सभी सदस्यों के आधार कार्ड
  • बैंक पासबुक या खाते का विवरण (DBT के लिए खाता सही और चालू होना चाहिए)
  • मनरेगा जॉब कार्ड (अगर बना हुआ है)
  • मौजूदा मकान की साफ़ तस्वीरें और, अगर हो, तो ज़मीन से जुड़ा कागज़
  • पहले के सर्वे या सूची का रेफरेंस नंबर, अगर पहले कभी सर्वे हुआ था
  • पहले दिए गए आवेदनों और उनकी पावतियों की प्रतियाँ

PMAY-G सूची 2026 से जुड़ी जानकारी भी इस तैयारी में मदद कर सकती है, क्योंकि सूची की स्थिति जानने के बाद ही यह तय होता है कि आपको सर्वे का रास्ता अपनाना है या दावा-आपत्ति का।

वे गलतियाँ जो दोबारा जुड़ना मुश्किल बना देती हैं

  • किसी एजेंट को पैसे देना: PMAY-G सर्वे और सूची की प्रक्रिया निःशुल्क है। पैसे माँगने वाला व्यक्ति धोखाधड़ी कर रहा हो सकता है। ऐसे मामले की जानकारी पंचायत या ब्लॉक कार्यालय को दें।
  • गलत जानकारी भरना: मकान की स्थिति, परिवार के सदस्य या आय के बारे में गलत जानकारी देने पर बाद में जाँच में नाम हट सकता है।
  • सिर्फ एक बार पूछकर छोड़ देना: सर्वे की खिड़की, ग्राम सभा की तारीख और दावा-आपत्ति की अंतिम तारीख — तीनों समय-सीमा वाली बातें हैं। एक बार पूछकर छोड़ देने से मौका निकल सकता है।
  • बिना पावती के आवेदन देना: लिखित आवेदन हमेशा पावती के साथ दें, ताकि बाद में यह साबित हो सके कि आपने समय पर अपनी बात दर्ज कराई थी।
  • अफवाहों पर भरोसा करना: “इस महीने सबको मकान मिल जाएगा” या “सर्वे बंद हो गया है” जैसी बातों की पुष्टि हमेशा पंचायत या ब्लॉक कार्यालय से करें। सर्वे की खिड़कियाँ राज्य और ज़िले के आदेश से खुलती और बढ़ती रहती हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. PMAY-G सर्वे में छूटा परिवार क्या दोबारा सर्वे में जुड़ सकता है?

हाँ, छूटे परिवारों को जोड़ने के लिए ही Awaas+ सर्वे लाया गया है। परिवार सेल्फ सर्वे या असिस्टेड सर्वे के ज़रिए दर्ज हो सकता है, और अगर सर्वे हो चुका है लेकिन नाम सूची में नहीं आया है, तो ग्राम सभा में दावा-आपत्ति दर्ज कर सकता है। अंतिम फैसला ग्राम सभा की जाँच और ज़िला स्तरीय अपीलीय समिति के बाद होता है।

2. सर्वे में नाम छूटने पर सबसे पहले क्या करना चाहिए?

सबसे पहले यह पुष्टि करें कि नाम सच में छूटा है — सही पंचायत, गाँव, नाम की spelling और रजिस्ट्रेशन नंबर से खोजें, फिर पंचायत कार्यालय में पूछें। इसके बाद ही सर्वे या दावा-आपत्ति का रास्ता चुनें।

3. सेल्फ सर्वे और असिस्टेड सर्वे में कौन सा बेहतर है?

दोनों का दर्जा बराबर है। अगर आपके पास स्मार्टफोन है और फेस ऑथेंटिकेशन हो जाता है, तो सेल्फ सर्वे तेज़ है। अगर फोन, नेटवर्क या फॉर्म भरने में दिक्कत है, तो असिस्टेड सर्वे बेहतर है, क्योंकि सर्वेक्षक आपकी मदद से जानकारी दर्ज करता है।

4. ग्राम सभा में दावा देने के बाद कितने समय में नाम जुड़ता है?

इसका कोई एक तय समय नहीं है। दावा-आपत्ति के बाद सूची ज़िला स्तरीय अपीलीय समिति के पास जाती है, और मंज़ूरी पंचायत के सालाना लक्ष्य के हिसाब से मिलती है। इसलिए दावा देने के बाद भी पंचायत से स्थिति पूछते रहें और अपनी पावती संभालकर रखें।

5. क्या सर्वे के लिए कोई फीस देनी पड़ती है?

नहीं, PMAY-G सर्वे निःशुल्क है। अगर कोई व्यक्ति सर्वे या सूची में नाम जुड़वाने के नाम पर पैसे माँगे, तो उसे पैसे न दें और इसकी जानकारी पंचायत या ब्लॉक कार्यालय को दें।

अस्वीकरण: यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है और सरकारी घोषणा का विकल्प नहीं है। PMAY-G के नियम, सर्वे की खिड़की, दावा-आपत्ति की तारीखें और पात्रता की शर्तें समय-समय पर बदल सकती हैं। अपनी स्थिति की अंतिम पुष्टि आधिकारिक पोर्टल pmayg.dord.gov.in या अपने ग्राम पंचायत / ब्लॉक कार्यालय से ही करें।

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