पहली किस्त मिलने के बाद जब घर का काम आगे बढ़ता है, तो हर लाभार्थी को दूसरी किस्त का इंतज़ार रहता है। लेकिन कई बार नींव या प्लिंथ का काम पूरा हो जाने के बाद भी दूसरी किस्त अटक जाती है। ऐसे में सबसे बड़ी गलती यह होती है कि लोग सिर्फ इंतज़ार करते रहते हैं या किसी बिचौलिए को पैसे दे देते हैं। हकीकत यह है कि PMAY-G दूसरी किस्त में देरी के पीछे आमतौर पर कोई एक बड़ी वजह नहीं, बल्कि जियो-टैग, बैंक लिंक, FTO या सत्यापन से जुड़ी कोई छोटी अड़चन होती है — जिसे सही जगह पता करके ही दूर किया जा सकता है।
इस लेख में हम PMAY-G की दूसरी किस्त में देरी के 7 आम कारण, उनकी पहचान का तरीका और हर कारण का सही हल आसान भाषा में समझेंगे। साथ ही यह भी जानेंगे कि अपनी किस्त की स्थिति कहाँ चेक करें और शिकायत किस क्रम में करें, ताकि आपका समय और पैसा दोनों बचें।
PMAY-G में किस्तें कैसे मिलती हैं?
प्रधानमंत्री आवास योजना – ग्रामीण के तहत मैदानी इलाकों में घर बनाने के लिए 1,20,000 रुपये और पहाड़ी या कठिन इलाकों में 1,30,000 रुपये की सहायता दी जाती है। यह रकम एक साथ नहीं मिलती, बल्कि निर्माण के चरणों के हिसाब से किस्तों में मिलती है। इसके अलावा मनरेगा के तहत 90 या 95 मानव-दिवस की मज़दूरी का लाभ और स्वच्छ भारत मिशन – ग्रामीण के तहत शौचालय के लिए 12,000 रुपये की सहायता अलग से जुड़ी होती है।
आम तौर पर प्रक्रिया इस तरह चलती है: स्वीकृति (sanction) के बाद पहली किस्त मिलती है, फिर निर्माण का एक चरण पूरा होने पर उसकी जियो-टैग वाली फोटो अपलोड और सत्यापित होती है, और उसके बाद अगली किस्त जारी होती है। दूसरी किस्त का मतलब सीधा है — पिछला चरण सत्यापित हुआ, तभी अगला भुगतान आगे बढ़ेगा। किस्तों का ठीक-ठीक बँटवारा राज्य के अनुसार थोड़ा अलग हो सकता है, इसलिए अपने राज्य या ब्लॉक में लागू बँटवारे को ही अंतिम मानें।
PMAY-G दूसरी किस्त में देरी के 7 आम कारण और उनका हल
1. जियो-टैग फोटो अपलोड नहीं हुई या अस्वीकृत हो गई
यह दूसरी किस्त अटकने का सबसे आम कारण है। अगर प्लिंथ या अगले चरण की जियो-टैग फोटो सिस्टम में नहीं पहुँची, तो अगली किस्त का ट्रिगर ही नहीं बनेगा — चाहे निर्माण वास्तव में पूरा हो गया हो। कभी फोटो धुंधली होती है, कभी गलत चरण की फोटो अपलोड हो जाती है, और कभी अधिकृत अधिकारी का दौरा ही देर से होता है।
हल: पहले यह पता करें कि आपके चरण की फोटो की स्थिति क्या है। ग्राम पंचायत सचिव या संबंधित क्षेत्रीय अधिकारी से लिखित या स्पष्ट रूप से पूछें कि फोटो कब अपलोड हुई या क्यों लंबित है। अगर दौरा नहीं हुआ है, तो पंचायत में लिखित अनुरोध दें और उसकी एक प्रति अपने पास रखें। जियो-टैग फोटो अपलोड की प्रक्रिया समझने से यह अंदाज़ा लगाना आसान हो जाता है कि अड़चन कहाँ है। अगर फोटो गलत अपलोड हुई है, तो गलत जियो-टैग फोटो के सुधार का तरीका भी पहले से जान लेना फायदेमंद है।
2. निर्माण का चरण वास्तव में पूरा नहीं माना गया
कई बार लाभार्थी को लगता है कि काम पूरा है, लेकिन सत्यापन के मानक के हिसाब से चरण अधूरा होता है — जैसे प्लिंथ की ऊँचाई पूरी नहीं हुई, दीवारें लिंटल स्तर तक नहीं पहुँचीं, या फोटो में वह चरण साफ नहीं दिख रहा। ऐसी स्थिति में अधिकारी अगला चरण सत्यापित नहीं कर पाता और किस्त रुक जाती है।
हल: अधिकारी से यह स्पष्ट पूछें कि किस चरण में क्या कमी बताई गई है। अनुमान पर दोबारा काम करने के बजाय उसी कमी को दूर करें, फिर दोबारा सत्यापन के लिए कहें। काम की प्रगति और अगली किस्त के बीच का संबंध समझने के लिए घर पूरा होने की प्रक्रिया भी पढ़ना उपयोगी है।
3. आधार-बैंक लिंक या DBT मैपिंग में गड़बड़ी
किस्त सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में DBT से जाती है। अगर आधार बैंक खाते से लिंक नहीं है, NPCI मैपिंग टूटी हुई है, खाता बंद या निष्क्रिय हो गया है, या खाते में नाम की स्पेलिंग आधार से मेल नहीं खाती, तो भुगतान अटक सकता है या वापस लौट सकता है। यह समस्या अक्सर तब सामने आती है जब पहली किस्त किसी पुराने खाते में आ गई थी और बाद में खाता बदल गया।
हल: बैंक शाखा में जाकर आधार सीडिंग और DBT स्थिति की पुष्टि कराएँ, और खाता सक्रिय है या नहीं, यह भी चेक करें। खाता बदलने की स्थिति में पंचायत या ब्लॉक कार्यालय को नई जानकारी समय पर दें। इस विषय की विस्तृत जानकारी DBT और महिला खाते से जुड़े नियमों वाले लेख में भी दी गई है।
4. FTO बन गया, लेकिन बैंक या PFMS स्तर पर भुगतान अटका
FTO यानी Fund Transfer Order भुगतान की प्रक्रिया शुरू होने का संकेत है, भुगतान पूरा होने की गारंटी नहीं। कभी FTO बनने के बाद बैंक स्तर पर भुगतान लंबित रहता है, कभी तकनीकी वजह से राशि वापस लौट जाती है, और लाभार्थी को लगता है कि किस्त आ ही नहीं रही।
हल: अपनी FTO स्थिति और बैंक स्टेटमेंट दोनों चेक करें। अगर FTO बना है लेकिन पैसा नहीं आया, तो बैंक स्टेटमेंट की प्रति और लाभार्थी विवरण के साथ पंचायत या ब्लॉक कार्यालय में री-क्रेडिट या स्थिति जांच का अनुरोध करें। FTO से किस्त चेक करने का तरीका इस जांच को आसान बनाता है।
5. ब्लॉक या ज़िला स्तर पर निधि जारी होने में देरी
कभी अड़चन लाभार्थी के स्तर पर नहीं, बल्कि निधि जारी करने की श्रृंखला में होती है। राज्य या ज़िले से ब्लॉक तक राशि पहुँचने में समय लग सकता है, या उस अवधि का लक्ष्य और आवंटन पूरा हो चुका होता है। ऐसी स्थिति में व्यक्तिगत फाइल सही होने के बावजूद भुगतान थोड़ा देर से होता है।
हल: पहले अपनी फाइल की स्थिति कन्फर्म करें — जियो-टैग, सत्यापन और FTO में कोई कमी तो नहीं। अगर फाइल साफ है, तो ब्लॉक कार्यालय से यह पूछें कि निधि जारी होने की वर्तमान स्थिति क्या है, और जवाब लिखित में लेने की कोशिश करें। किस्त जारी होने की प्रक्रिया समझने से यह फर्क करना आसान होता है कि देरी फाइल में है या निधि जारी करने में।
6. लाभार्थी विवरण में नाम, खाता या मोबाइल का अंतर
आधार, बैंक खाता और योजना रिकॉर्ड में नाम की स्पेलिंग, खाता संख्या या मोबाइल नंबर का छोटा सा अंतर भी भुगतान रोक सकता है। कई बार मोबाइल नंबर बदल जाने से OTP या सूचना नहीं मिलती, और लाभार्थी को लगता है कि किस्त आई ही नहीं।
हल: तीनों जगह — आधार, बैंक और योजना रिकॉर्ड — विवरण मिलाकर देखें। अंतर मिलने पर संबंधित कार्यालय में सुधार का आवेदन दें और पावती (receipt) ज़रूर लें। पात्रता और दस्तावेज़ों की गाइड में सही विवरण रखने का महत्व विस्तार से समझाया गया है।
7. निरीक्षण या सत्यापन की कतार में देरी
एक अधिकारी कई गाँवों का काम देखता है, इसलिए निरीक्षण का दौरा देर से हो सकता है। बारिश, अधिकारी की अनुपलब्धता या सत्यापन की लंबी कतार भी देरी का कारण बन सकती है। यह देरी असुविधाजनक है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आपका नाम सूची से हट गया है।
हल: पंचायत सचिव से निरीक्षण की तारीख के बारे में पूछें और अगर लंबे समय तक कोई दौरा नहीं होता, तो ब्लॉक विकास अधिकारी (BDO) कार्यालय में लिखित अनुरोध दें। लिखित अनुरोध का फायदा यह है कि आगे शिकायत करते समय आपके पास तारीख और प्रमाण दोनों रहते हैं।
पहले यह 4 जांच करें — देरी का कारण खुद पता करें
- चरण की स्थिति: आपका निर्माण किस चरण पर दर्ज है — प्लिंथ, लिंटल या अगला चरण? फोटो अपलोड हुई है या लंबित है?
- FTO स्थिति: दूसरी किस्त के लिए FTO बना है या नहीं? बना है तो बैंक में राशि आई या वापस लौटी?
- बैंक खाता: खाता सक्रिय है, आधार से लिंक है और DBT मैपिंग सही है?
- विवरण: नाम, खाता संख्या और मोबाइल नंबर तीनों जगह एक जैसे हैं?
PMAY-G दूसरी किस्त में देरी की इन चार जांचों के बाद आमतौर पर यह साफ हो जाता है कि अड़चन जियो-टैग में है, बैंक में है, FTO में है या निधि जारी करने में। बिना जांच के शिकायत करने से अक्सर वही जवाब मिलता है — “जांच चल रही है” — जबकि सही जांच के साथ आप सीधा कारण बता सकते हैं। अगर पहली किस्त भी नहीं आई थी, तो किस्त न आने के कारणों वाला लेख भी देखें, क्योंकि कई कारण दोनों किस्तों में एक जैसे होते हैं।
शिकायत किस क्रम में करें?
शिकायत का सही क्रम समय बचाता है। एक ही शिकायत को एक साथ कई जगह भेजने से काम तेज़ नहीं होता, बल्कि फाइल भटक सकती है।
- ग्राम पंचायत: पंचायत सचिव से चरण, फोटो और सत्यापन की स्थिति पूछें।
- ब्लॉक कार्यालय (BDO): अगर पंचायत स्तर पर हल न हो, तो लिखित आवेदन के साथ BDO कार्यालय जाएँ। आवेदन में अपना रजिस्ट्रेशन नंबर, चरण, FTO स्थिति और बैंक विवरण साफ लिखें।
- ज़िला स्तर: ब्लॉक से समाधान न मिलने पर ज़िला ग्रामीण विकास एजेंसी या संबंधित ज़िला कार्यालय में लिखित शिकायत करें।
- CPGRAMS और हेल्पलाइन: स्थानीय स्तर पर लंबे समय तक कोई कार्रवाई न हो, तो CPGRAMS पर शिकायत दर्ज की जा सकती है। PMAY-G की टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-11-6446 है — कॉल करने से पहले अपना रजिस्ट्रेशन नंबर और चरण की जानकारी तैयार रखें।
शिकायत दर्ज करते समय किसी को भी “काम करवाने” के नाम पर पैसे न दें। PMAY-G में किसी बिचौलिए की ज़रूरत नहीं है, और पैसे माँगने वाला व्यक्ति फ्रॉड भी हो सकता है।
शिकायत के समय ये दस्तावेज़ साथ रखें
- स्वीकृति आदेश (sanction order) की प्रति
- आधार कार्ड और बैंक पासबुक की प्रति
- बैंक स्टेटमेंट — खासकर वह अवधि जब किस्त आनी थी
- निर्माण की तारीख़वार फोटो, अगर उपलब्ध हों
- पंचायत या ब्लॉक को दिए गए पहले आवेदनों की पावती
कब धैर्य रखें और कब कार्रवाई करें?
दूसरी किस्त के लिए कोई एक तय राष्ट्रीय समय-सीमा इस लेख में दावा नहीं की जा रही, क्योंकि निधि जारी करना और सत्यापन राज्य व ज़िले की प्रक्रिया पर निर्भर करता है। लेकिन एक सामान्य सिद्धांत काम आता है: अगर चरण सत्यापित हो चुका है और FTO भी बन गया है, फिर भी लंबा समय बीत गया है, तो यह सिर्फ इंतज़ार का मामला नहीं — जांच का मामला है। वहीं, अगर जियो-टैग या निरीक्षण ही लंबित है, तो पहले उसी अड़चन को दूर करना ज़रूरी है, क्योंकि उसके बिना अगला कदम आगे नहीं बढ़ेगा।
अपनी स्वीकृति और चरण की स्थिति के लिए स्वीकृति आदेश की प्रति अपने पास रखें, ताकि शिकायत में सही संदर्भ दे सकें। PMAY-G दूसरी किस्त में देरी को समझने के लिए यही दस्तावेज़ सबसे पहले माँगा जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. PMAY-G दूसरी किस्त में देरी का सबसे आम कारण क्या है?
सबसे आम कारण जियो-टैग फोटो का अपलोड न होना, गलत या अस्वीकृत फोटो, या निरीक्षण में देरी है। इसके बाद आधार-बैंक लिंक और FTO स्तर की अड़चनें आती हैं। पहले चरण की स्थिति और FTO जांचें, फिर उसी के हिसाब से पंचायत या ब्लॉक से संपर्क करें।
2. दूसरी किस्त के लिए FTO बन गया है, फिर भी पैसा नहीं आया — क्या करें?
FTO का मतलब है भुगतान की प्रक्रिया शुरू हुई है, न कि पैसा खाते में पहुँच गया है। बैंक स्टेटमेंट चेक करें — राशि वापस तो नहीं लौटी। अगर पैसा नहीं आया, तो स्टेटमेंट और लाभार्थी विवरण के साथ पंचायत या ब्लॉक कार्यालय में स्थिति जांच का लिखित अनुरोध दें।
3. क्या जियो-टैग फोटो लाभार्थी खुद अपलोड कर सकता है?
नहीं, जियो-टैग फोटो अधिकृत क्षेत्रीय अधिकारी के माध्यम से आधिकारिक ऐप से अपलोड की जाती है। लाभार्थी का काम यह सुनिश्चित करना है कि निर्माण चरण पूरा हो, दौरा हो और फोटो की स्थिति का पता चलता रहे।
4. दूसरी किस्त में देरी हो तो क्या दोबारा आवेदन करना चाहिए?
नहीं, दोबारा आवेदन करने से फाइल में डुप्लिकेट की समस्या पैदा हो सकती है। सही तरीका यह है कि मौजूदा फाइल की स्थिति जांचें और उसी फाइल में अड़चन दूर कराएँ — पंचायत, फिर ब्लॉक, फिर ज़िला स्तर पर।
5. किस्त की शिकायत के लिए हेल्पलाइन नंबर क्या है?
PMAY-G की टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-11-6446 है। कॉल से पहले अपना रजिस्ट्रेशन नंबर, गाँव और ब्लॉक का नाम और किस्त का चरण तैयार रखें, ताकि आपकी शिकायत सही फाइल से जोड़ी जा सके।
अस्वीकरण: यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है, आधिकारिक सरकारी घोषणा नहीं है। PMAY-G के नियम, किस्तों का बँटवारा और प्रक्रिया राज्य के अनुसार बदल सकती है। अपनी स्थिति की पुष्टि आधिकारिक पोर्टल pmayg.dord.gov.in या अपनी ग्राम पंचायत व ब्लॉक कार्यालय से ज़रूर करें।