PMAY-G जियो-टैगिंग फोटो: कैसे लें और गलतियों से बचें

सितम्बर 30, 2026
Written By Ali Akbar

प्रधानमंत्री आवास योजना – ग्रामीण (PMAY-G) में घर का पैसा चरण-दर-चरण (स्टेज-वाइज) मिलता है, और हर स्टेज पर घर की सही जियो-टैग्ड फोटो का बहुत बड़ा रोल होता है। ज़्यादातर किस्तें इसी वजह से अटकती हैं कि फोटो धुंधली होती है, GPS लोकेशन सही नहीं होती, या एक ही फोटो अलग-अलग स्टेज पर लगा दी जाती है।

इस लेख में हम स्टेप बाय स्टेप देखेंगे कि जियो-टैगिंग क्या है, फोटो कैसे लें, कौन-सी गलतियाँ रिजेक्शन करवाती हैं, और स्टेटस कैसे चेक करें।

PMAY-ग्रामीण क्या है?

प्रधानमंत्री आवास योजना – ग्रामीण गाँव के बिना घर वाले और कच्चे घर में रहने वाले परिवारों को पक्का घर देने की सरकारी योजना है। यह ग्रामीण विकास मंत्रालय (Ministry of Rural Development) के ज़रिए चलती है।

इससे पहले इंदिरा आवास योजना (IAY) थी, जिसे 1 अप्रैल 2016 से PMAY-G के नाम से नए रूप में चलाया गया।

योजना सिर्फ़ घर बनाने तक सीमित नहीं है। घर के साथ शौचालय (स्वच्छ भारत मिशन – ग्रामीण से), मनरेगा (MGNREGA) की मज़दूरी और अन्य सरकारी योजनाओं का फ़ायदा जोड़ने की कोशिश की जाती है।

फेज़ 2024-25 से 2028-29 में 2 करोड़ अतिरिक्त घर बनाने का लक्ष्य मंज़ूर हुआ है। इसी के लिए Awaas+ 2024 सर्वे करवाया गया, ताकि जो परिवार पहले की सूची में छूट गए थे, उन्हें जोड़ दिया जाए।

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PMAY-G की मुख्य बातें

विवरणजानकारी
योजना का नामप्रधानमंत्री आवास योजना – ग्रामीण (PMAY-G)
शुरुआत1 अप्रैल 2016 (IAY की जगह)
मंत्रालयग्रामीण विकास मंत्रालय
आधिकारिक पोर्टलpmayg.dord.gov.in (पुराना पता pmayg.dord.gov.in)
सहायता राशि (मैदानी क्षेत्र)₹1,20,000
सहायता राशि (पहाड़ी/दुर्गम क्षेत्र, IAP ज़िले)₹1,30,000
लक्ष्य (2024-25 से 2028-29)2 करोड़ अतिरिक्त घर
सर्वेAwaas+ 2024

PMAY-G के लिए पात्रता (Eligibility)

यह योजना उन परिवारों के लिए है जो SECC 2011 या Awaas+ सर्वे के आवास-अभाव (housing deprivation) मापदंडों में आते हैं। यानी आपके घर की हालत के हिसाब से प्राथमिकता तय होती है।

कौन पात्र है?

  • बिना घर वाले (houseless) परिवार
  • कच्ची दीवार और कच्ची छत वाले घर में रहने वाले परिवार
  • SC/ST, अल्पसंख्यक और अन्य कमज़ोर वर्ग के परिवार
  • विधवा, दिव्यांग और भूमिहीन (landless) लाभार्थी

कौन पात्र नहीं है?

अगर परिवार में नीचे दी गई शर्तों में से कोई भी लागू होती है, तो परिवार आम तौर पर योजना के लिए पात्र नहीं माना जाता:

  • परिवार के पास मोटरचालित चार-पहिया वाहन है
  • मशीनी खेती के उपकरण (जैसे ट्रैक्टर) हैं
  • ₹50,000 या उससे ज़्यादा लिमिट का किसान क्रेडिट कार्ड है
  • परिवार का कोई सदस्य सरकारी नौकरी में है
  • परिवार का कोई सदस्य रजिस्टर्ड गैर-कृषि उद्यम चलाता है
  • परिवार का सबसे ज़्यादा कमाने वाला सदस्य ₹15,000 महीने से ज़्यादा कमाता है
  • परिवार इनकम टैक्स या प्रोफ़ेशनल टैक्स भरता है

पात्रता के नियम समय-समय पर बदलते रहते हैं, इसलिए अपनी स्थिति की पुष्टि ग्राम पंचायत या ब्लॉक ऑफिस से ज़रूर कर लें।

SECC 2011 और Awaas+ 2024 में फ़र्क

SECC 2011 पुरानी सर्वे सूची है, जिसमें 2011 में सर्वे हुए परिवार शामिल हैं। Awaas+ 2024 नया सर्वे है, जिसमें वे परिवार जोड़े गए जो पहले छूट गए थे या जिनका घर अब कच्चा हो गया है। दोनों सूचियों को मिलाकर परमानेंट वेट लिस्ट (PWL) बनाई जाती है। परमानेंट वेट लिस्ट वह सूची है जिसमें नाम आने के बाद स्वीकृति (sanction) का इंतज़ार करना होता है।

ज़रूरी दस्तावेज़

घर के लिए प्रक्रिया शुरू करने से पहले ये दस्तावेज़ तैयार रखें:

दस्तावेज़क्यों ज़रूरी है
आधार कार्डपहचान और बैंक खाता लिंकिंग के लिए
बैंक पासबुककिस्त ट्रांसफर के लिए (आधार से लिंक होनी चाहिए)
मनरेगा जॉब कार्डमज़दूरी के दिनों (wage days) का फ़ायदा लेने के लिए
जाति प्रमाण पत्रSC/ST होने पर सत्यापन के लिए
आधार से लिंक मोबाइल नंबरOTP और सत्यापन के लिए

आधार और बैंक खाते में नाम की स्पेलिंग बिल्कुल एक जैसी होनी चाहिए। मिसमैच होने पर पेमेंट फेल हो सकता है।

Awaas+ 2024 सर्वे कैसे होता है

जिनका नाम SECC 2011 की सूची में नहीं था, उनके लिए Awaas+ 2024 सर्वे करवाया गया। यह सर्वे AwaasPlus 2024 मोबाइल ऐप के ज़रिए होता है।

सर्वे अभी खुला है या नहीं, इसकी जानकारी अपनी ग्राम पंचायत से लें।

ग्राम पंचायत के ज़रिए सर्वे

  1. अपनी ग्राम पंचायत या पंचायत सचिव से मिलकर नाम जोड़ने को कहें।
  2. सर्वेयर आपके घर आकर जानकारी दर्ज करता है और घर की फोटो लेता है।
  3. आधार-आधारित फेस ऑथेंटिकेशन (eKYC) किया जाता है।

मोबाइल से सेल्फ-सर्वे

  1. Google Play Store से आधिकारिक “AwaasPlus 2024” ऐप डाउनलोड करें।
  2. मोबाइल नंबर से OTP वेरिफिकेशन करें।
  3. आधार-आधारित फेस ऑथेंटिकेशन पूरा करें।
  4. परिवार की डिटेल्स भरें।
  5. घर की फोटो कैप्चर करें।
  6. सर्वे सबमिट करें।

ऐप में एरर आए तो

  • ऐप को Google Play Store से अपडेट करें।
  • वही मोबाइल नंबर डालें जो आधार से लिंक है।
  • इंटरनेट स्लो हो तो कुछ देर बाद दोबारा कोशिश करें।
  • फिर भी समस्या हो तो ग्राम पंचायत से असिस्टेड सर्वे की रिक्वेस्ट करें।

जियो-टैगिंग क्या है और क्यों ज़रूरी है?

जियो-टैगिंग का मतलब है कि घर की फोटो के साथ उसकी GPS लोकेशन और तारीख-समय भी रिकॉर्ड हो जाए।

यह फोटो AwaasApp से ली जाती है और AwaasSoft पर अपलोड होती है। AwaasSoft वह सरकारी सॉफ़्टवेयर है जिसमें योजना की सारी लाभार्थी जानकारी और फोटो रखी जाती हैं।

जियो-टैगिंग इसलिए ज़रूरी है क्योंकि इससे सरकार को पता चलता है कि घर सच में उस जगह पर बन रहा है। इससे फ़र्ज़ी या पुरानी फोटो लगाकर पैसा लेने की कोशिश रुकती है।

निर्माण के हर स्टेज की फोटो के आधार पर ही अगली किस्त जारी होती है।

घर की फोटो कैसे लें

फोटो लेने के नियम

  • GPS एक्यूरेसी: फोटो लेने से पहले GPS ON करें और एक्यूरेसी 5 मीटर से कम आने तक रुकें।
  • एंगल: फोटो ऐसे एंगल से लें कि पूरा निर्माण स्टेज फ्रेम में दिखे।
  • रोशनी: धूप आपकी पीठ के पीछे हो, सामने नहीं।
  • वही लोकेशन: हर स्टेज की फोटो उसी जगह से लें जहाँ से पिछली फोटो ली गई थी।
  • लाभार्थी की फोटो: कंप्लीशन स्टेज पर लाभार्थी की फोटो भी लेनी होती है, लेकिन उसके हाथ में कोई प्लेकार्ड या ब्लैकबोर्ड नहीं होना चाहिए।
  • मौसम और समय: कोहरे, बारिश या देर शाम में फोटो न लें, क्योंकि फोटो साफ़ नहीं आएगी।

फोटो लेने से पहले की चेकलिस्ट

  • GPS ON है और एक्यूरेसी 5 मीटर से कम दिख रही है।
  • मोबाइल की बैटरी और इंटरनेट ठीक हैं।
  • धूप पीठ के पीछे है।
  • पूरा निर्माण स्टेज फ्रेम में आ रहा है।
  • कंप्लीशन स्टेज पर लाभार्थी फोटो में मौजूद है।

अगर इनमें से कोई भी पॉइंट पूरा नहीं है, तो पहले उसे ठीक करें, फिर फोटो लें। एक गलत फोटो पूरी किस्त रोक सकती है।

फोटो अपलोड की प्रक्रिया

AwaasApp के ज़रिए फोटो आम तौर पर ग्राम पंचायत या ब्लॉक के अधिकृत कर्मचारी (जैसे पंचायत सचिव या रोज़गार सेवक) लेते और अपलोड करते हैं। प्रक्रिया कुछ इस तरह होती है:

  1. AwaasApp में लॉगिन करके लाभार्थी को सर्च किया जाता है।
  2. निर्माण का स्टेज सेलेक्ट किया जाता है।
  3. GPS एक्यूरेसी ठीक होने तक इंतज़ार किया जाता है।
  4. घर की फोटो ली जाती है (कंप्लीशन पर लाभार्थी के साथ)।
  5. फोटो सेव करके अपलोड कर दी जाती है।
  6. उसके बाद फोटो की जाँच (वेरिफिकेशन) होती है।

लाभार्थी की ज़िम्मेदारी है कि जिस दिन फोटो ली जानी है, उस दिन स्टेज का काम पूरा हो और वह मौजूद रहे। अपने सचिव या रोज़गार सेवक से पहले से बात करके दिन तय कर लें।

इस बारे में भी जानें: बारिश के बाद स्टेज पूरा होने पर फोटो अपलोड करने का तरीका

फोटो रिजेक्ट करवाने वाली आम गलतियाँ

CAG की ऑडिट रिपोर्ट्स में भी PMAY-G के जियो-टैग्ड फोटो से जुड़ी कई गड़बड़ियाँ पकड़ी गई हैं, जैसे एक ही फोटो का अलग-अलग स्टेज पर इस्तेमाल होना। इन गलतियों से बचें:

गलतीक्या समस्या होती है
हर स्टेज पर एक ही फोटो लगानाअलग स्टेज का काम अलग दिखना चाहिए, वरना फोटो रिजेक्ट हो सकती है
पुराने स्टेज की फोटो अगले स्टेज पर लगानाजैसे प्लिंथ की फोटो लिंटल स्टेज पर अपलोड करना
पुरानी या किसी और जगह की फोटो लगानालोकेशन और घर मैच नहीं करते
धुंधली या अँधेरी फोटोघर और स्टेज साफ़ नहीं पहचाने जाते
अधूरे घर को कंप्लीट दिखानावेरिफिकेशन में पकड़ा जाता है
GPS एक्यूरेसी 5 मीटर से ज़्यादालोकेशन सही रिकॉर्ड नहीं होती
कंप्लीशन पर लाभार्थी की फोटो न होनायह ज़रूरी हिस्सा है
धूप सामने से फोटो लेनाघर अँधेरा और अस्पष्ट दिखता है
कोहरे या बारिश में फोटो लेनाफोटो क्वालिटी खराब हो जाती है

पैसा कैसे मिलता है?

सर्वे के बाद जब नाम परमानेंट वेट लिस्ट में आता है और सैंक्शन ऑर्डर मिलता है, तब घर बनाने का काम शुरू होता है। पैसा सीधे आपके बैंक खाते में DBT के ज़रिए आता है, लेकिन एक साथ नहीं, बल्कि निर्माण के स्टेज के हिसाब से किस्तों में।

किस्तों की संख्या और हर किस्त की राशि राज्य के नियमों के अनुसार अलग हो सकती है, इसलिए अपने सैंक्शन ऑर्डर में लिखी डिटेल्स देखें।

हर किस्त से पहले उस स्टेज की जियो-टैग्ड फोटो और वेरिफिकेशन ज़रूरी होता है। FTO (Fund Transfer Order) वह ऑर्डर है जिसके जारी होने के बाद बैंक खाते में पैसा आता है।

सहायता राशि

क्षेत्रसहायता राशि
मैदानी (plain) इलाके₹1,20,000
पहाड़ी/मुश्किल इलाके (हिमाचल, उत्तराखंड, J&K, लद्दाख, नॉर्थ-ईस्ट)₹1,30,000
IAP/LWE (नक्सल-प्रभावित) चुनिंदा ज़िले₹1,30,000

अन्य फ़ायदे

  • मनरेगा के तहत घर बनाने के लिए कुछ दिन की मज़दूरी (आम तौर पर 90 दिन, IAP ज़िलों में 95 दिन) अलग से मिल सकती है।
  • स्वच्छ भारत मिशन – ग्रामीण के तहत शौचालय के लिए ₹12,000 तक की मदद मिल सकती है।
  • मनरेगा की मज़दूरी के लिए जॉब कार्ड होना ज़रूरी है। इसके लिए ग्राम पंचायत से बात करें।

अपना नाम और स्टेटस कैसे चेक करें?

रजिस्ट्रेशन नंबर से

  1. pmayg.dord.gov.in खोलें (पुराना pmayg.dord.gov.in भी रीडायरेक्ट हो सकता है)।
  2. Stakeholders मेन्यू में जाएँ।
  3. IAY/PMAYG Beneficiary सेलेक्ट करें।
  4. रजिस्ट्रेशन नंबर डालें।
  5. कैप्चा भरकर सबमिट करें।

यहाँ आपको सैंक्शन, किस्त और FTO से जुड़े स्टेटस दिखते हैं।

ग्राम पंचायत की सूची से (बिना रजिस्ट्रेशन नंबर)

  1. AwaasSoft सेक्शन में जाएँ।
  2. Report, फिर Social Audit Reports, फिर “Beneficiary details for verification” चुनें।
  3. राज्य, ज़िला, ब्लॉक और ग्राम पंचायत सेलेक्ट करें।
  4. पूरी सूची देखें या डाउनलोड करें।

रजिस्ट्रेशन नंबर खो गया हो तो

  • ग्राम पंचायत से H.1 Rural Housing Report माँगें। इसमें गाँव के सभी नाम रजिस्ट्रेशन नंबर के साथ होते हैं।
  • या Social Audit Report से अपना नाम ढूँढें।
  • ब्लॉक ऑफिस से भी आधार कार्ड दिखाकर रजिस्ट्रेशन नंबर मिल सकता है।

आम समस्याएँ और उनके हल

नाम सूची में नहीं आ रहा

  • ग्राम पंचायत से Awaas+ सर्वे के बारे में पूछें।
  • सर्वे हो चुका है लेकिन नाम नहीं आया, तो BDO को लिखित शिकायत दें।
  • ज़रूरत हो तो RTI फ़ाइल करें।

किस्त नहीं मिल रही

  • पोर्टल पर FTO स्टेटस चेक करें।
  • बैंक पासबुक में नाम, खाता नंबर और IFSC कोड चेक करें।
  • खाता आधार से लिंक होना चाहिए।
  • सब ठीक होने पर भी पैसा न आए, तो CPGRAMS पोर्टल पर शिकायत करें।

जियो-टैग्ड फोटो रिजेक्ट हो गई

  • ब्लॉक ऑफिस से दोबारा इंस्पेक्शन या फोटो की रिक्वेस्ट करें।
  • अगली बार GPS एक्यूरेसी, धूप की दिशा और पूरे स्टेज के फ्रेम में आने को चेक करें।
  • कंप्लीशन पर लाभार्थी की फोटो ज़रूर शामिल करवाएँ।

अगर फोटो पहले ही गलत है, तो PMAY-G जियो टैगिंग फोटो सुधार की पूरी प्रक्रिया पढ़ें।

ग्राम पंचायत सहयोग नहीं कर रही

  • BDO को लिखित शिकायत दें और रसीद ज़रूर लें।
  • डिस्ट्रिक्ट रूरल डेवलपमेंट एजेंसी (DRDA) से संपर्क करें।
  • CPGRAMS पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें।
  • RTI फ़ाइल करें। RTI का जवाब आम तौर पर 30 दिन में मिलता है।

हेल्पलाइन और शिकायत

सेवासंपर्क
PMAY-G टोल-फ्री हेल्पलाइन1800-11-6446 / 1800-11-8111
शिकायत ईमेलsupport-pmayg@gov.in
CPGRAMS पोर्टलpgportal.gov.in

ये सभी सेवाएँ मुफ़्त हैं। अगर कोई नाम सूची में डालने या पैसा दिलवाने के बदले पैसे माँगे, तो यह फ़्रॉड है।

धोखाधड़ी से बचें

PMAY-G में कोई प्राइवेट एजेंट नहीं होता। सूची देखना और सर्वे करवाना मुफ़्त है। सिर्फ़ आधिकारिक पोर्टल pmayg.dord.gov.in और आधिकारिक ऐप्स AwaasPlus 2024 और AwaasApp का ही उपयोग करें। किसी अनजान लिंक या फ़ेक ऐप पर अपनी आधार या बैंक डिटेल्स न डालें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

जियो-टैगिंग क्या है?
जियो-टैगिंग में घर की फोटो के साथ GPS लोकेशन और तारीख-समय रिकॉर्ड होता है। यह फोटो AwaasApp से ली जाती है और AwaasSoft पर अपलोड होती है। स्टेज-वाइज किस्त जारी होने में इसका बड़ा रोल होता है।

घर की फोटो कैसे लें?
AwaasApp से फोटो लें। GPS एक्यूरेसी 5 मीटर से कम होने तक रुकें, धूप पीठ के पीछे रखें और पूरा निर्माण स्टेज फ्रेम में लाएँ। कंप्लीशन स्टेज पर लाभार्थी की फोटो भी ज़रूरी है।

फोटो किस-किस स्टेज पर लेनी होती है?
निर्माण के अलग-अलग स्टेज पर फोटो लेनी होती है, जैसे घर का काम शुरू होने से पहले, प्लिंथ/फ़ाउंडेशन, लिंटल, छत और कंप्लीशन। किस स्टेज पर क्या चाहिए, इसकी पूरी जानकारी अपने ब्लॉक ऑफिस से कन्फर्म कर लें, क्योंकि राज्य के हिसाब से प्रक्रिया अलग हो सकती है।

फोटो रिजेक्ट हो गई तो क्या करें?
ब्लॉक ऑफिस से दोबारा इंस्पेक्शन की रिक्वेस्ट करें। ग्राम पंचायत से बात करें, और ज़रूरत पर BDO को लिखित शिकायत दें। अगली फोटो लेने से पहले GPS, एंगल और रोशनी अच्छी तरह चेक करें।

Awaas+ 2024 सर्वे में कैसे अप्लाई करें?
AwaasPlus 2024 ऐप से सेल्फ-सर्वे करें या ग्राम पंचायत से असिस्टेड सर्वे करवाएँ। ऐप में OTP वेरिफिकेशन, आधार-आधारित फेस ऑथेंटिकेशन और घर की फोटो की ज़रूरत होती है।

PMAY-G सूची में नाम कैसे चेक करें?
pmayg.dord.gov.in खोलें, Stakeholders मेन्यू में IAY/PMAYG Beneficiary चुनें, रजिस्ट्रेशन नंबर डालें और कैप्चा भरें।

रजिस्ट्रेशन नंबर नहीं है तो क्या करें?
ग्राम पंचायत से H.1 Rural Housing Report माँगें, या AwaasSoft की Social Audit Report देखें। ब्लॉक ऑफिस से भी आधार दिखाकर रजिस्ट्रेशन नंबर मिल सकता है।

कितनी किस्तें मिलती हैं?
किस्तों की संख्या और हर किस्त की राशि राज्य के नियम और सैंक्शन ऑर्डर पर निर्भर करती है। पैसा घर के अलग-अलग स्टेज पूरे होने पर, वेरिफिकेशन के बाद किस्तों में आता है।

मनरेगा जॉब कार्ड ज़रूरी है?
घर के लिए जॉब कार्ड होना शर्त नहीं है, लेकिन मनरेगा की मज़दूरी का फ़ायदा लेने के लिए जॉब कार्ड ज़रूरी है।

क्या पक्के घर वाले अप्लाई कर सकते हैं?
नहीं। जिनके पास पहले से पक्का घर है, वे आम तौर पर इस योजना के लिए पात्र नहीं होते।

किस्त नहीं मिली, कहाँ शिकायत करें?
पहले पोर्टल पर FTO स्टेटस देखें। अगर FTO पेंडिंग है, तो बैंक में आधार सीडिंग और नाम की स्पेलिंग चेक करवाएँ। सब ठीक होने पर भी पैसा न आए, तो CPGRAMS (pgportal.gov.in) पर शिकायत करें या support-pmayg@gov.in पर ईमेल भेजें।

सर्वे में नाम है लेकिन पैसा नहीं आया, क्या करें?
सर्वे में नाम होने का मतलब है कि आप सूची में हैं। पैसा सैंक्शन ऑर्डर मिलने और स्टेज-वाइज काम और फोटो वेरिफाई होने के बाद आता है। रजिस्ट्रेशन नंबर से स्टेटस चेक करें और ज़रूरत पर ब्लॉक ऑफिस से संपर्क करें।

निष्कर्ष

PMAY-G से घर मिलना आपका हक़ है, लेकिन सही जियो-टैग्ड फोटो के बिना किस्त अटक सकती है।

इसलिए हर स्टेज की फोटो ध्यान से लें, GPS एक्यूरेसी चेक करें, और एक ही फोटो बार-बार इस्तेमाल न करें। सिर्फ़ आधिकारिक पोर्टल और आधिकारिक ऐप्स का ही उपयोग करें।

आज ही pmayg.dord.gov.in पर अपना स्टेटस चेक करें। मदद के लिए हेल्पलाइन 1800-11-6446 / 1800-11-8111 पर कॉल करें।

अगर जियो-टैग फोटो में देरी या रिजेक्शन के कारण दूसरी किस्त अटक गई है, तो PMAY-G दूसरी किस्त में देरी के कारण और हल भी देखें — इसमें जियो-टैग, सत्यापन और अगली किस्त से जुड़ी अड़चनों की पहचान का तरीका दिया गया है।

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