PMAY-G के तहत महिलाओं को निशाना बनाने वाले धोखेबाज़ एजेंटों से कैसे बचें

सितम्बर 23, 2026
Written By Ali Akbar

आपके गाँव में भी कोई ऐसा आदमी आया होगा जो कहे, “मेरे पास सेटिंग है, ₹5,000 दो और PMAY-ग्रामीण का घर पक्का।” ऐसा आदमी झूठ बोल रहा है।

प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण में कोई एजेंट या बिचौलिया नहीं चलता। घर सिर्फ़ Awaas+ सर्वे, ग्राम सभा सत्यापन और DBT किस्त के ज़रिए मिलता है। इस योजना में ज़्यादातर घर महिलाओं के नाम पर हैं, इसलिए फर्जी लोग विधवाओं, अकेली माँओं और कम पढ़ी-लिखी महिलाओं को खास निशाना बनाते हैं।

इस गाइड में हम बताएँगे कि फर्जी एजेंट कैसे काम करते हैं, असली प्रक्रिया क्या है और बिना किसी को पैसा दिए अपना नाम खुद कैसे चेक करें।

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PMAY-ग्रामीण एक नज़र में

विवरणजानकारी
योजना का नामप्रधानमंत्री आवास योजना – ग्रामीण (PMAY-G)
शुरुआत1 अप्रैल 2016 (इंदिरा आवास योजना की जगह)
मंत्रालयग्रामीण विकास मंत्रालय
आधिकारिक पोर्टलpmayg.dord.gov.in (pmayg.dord.gov.in पर भी खुलता है)
सहायता राशि (मैदानी क्षेत्र)₹1.20 लाख
सहायता राशि (पहाड़ी/पूर्वोत्तर क्षेत्र)₹1.30 लाख
लक्ष्य4.95 करोड़ घर (मार्च 2029 तक)
हेल्पलाइन1800-11-6446
ईमेलsupport-pmayg@gov.in

PMAY-ग्रामीण क्या है?

PMAY-ग्रामीण ग्रामीण विकास मंत्रालय की फ्लैगशिप योजना है। इसका मकसद है कि हर ग्रामीण परिवार को अपना पक्का घर मिले। यह योजना 1 अप्रैल 2016 से इंदिरा आवास योजना (IAY) की जगह चल रही है।

घर के साथ बुनियादी सुविधाएँ भी जुड़ी हैं। स्वच्छ भारत मिशन से शौचालय के लिए ₹12,000 अलग से मिलते हैं, और मनरेगा (MGNREGA) के तहत घर बनाने के लिए अकुशल मज़दूरी के दिन भी मिलते हैं। योजना को अब मार्च 2029 तक बढ़ा दिया गया है।

लेकिन जब भी कोई नई सूची या नया लक्ष्य आता है, फर्जी एजेंट सक्रिय हो जाते हैं। “अभी फॉर्म भर दो, वरना मौका निकल जाएगा” बोलकर वे पैसा माँगते हैं।

फर्जी एजेंट कैसे काम करते हैं?

इनका तरीका सीधा है: डर, झूठ और डेडलाइन। पहले डराते हैं कि “सर्वे नहीं हुआ तो नाम कट जाएगा।” फिर बोलते हैं “मेरे पास सेटिंग है।” आखिर में डेडलाइन देते हैं कि “आज ही पैसे दो, कल सूची बंद हो जाएगी।”

कई बार ये लोग गाँव या पंचायत स्तर पर आपके आस-पास ही होते हैं। इसलिए किसी के भी बोलने पर यकीन करने के बजाय हर कदम खुद वेरिफाई करें।

3 सबसे बड़े झूठ

झूठ 1: “सीधा आवंटन करवा दूँगा।”
PMAY-ग्रामीण में सीधा आवंटन नहीं होता। घर Awaas+ सर्वे और ग्राम सभा सत्यापन के बाद ही मिलता है।

झूठ 2: “पैसे दो, नाम सूची में चढ़ा दूँगा।”
ग्राम सभा की सूची सार्वजनिक होती है। अगर आप पात्र हैं तो आपका नाम प्रक्रिया से आएगा। अगर पात्र नहीं हैं तो कोई एजेंट कुछ नहीं कर सकता।

झूठ 3: “किस्त अटकी है, ₹2,000 दो तो रिलीज़ करवा दूँगा।”
किस्त DBT से सीधे बैंक खाते में आती है। कोई एजेंट उसे रिलीज़ नहीं करवा सकता।

इन बातों से संभल जाएँ

  • “मेरे पास सेटिंग है, घर पक्का मिलेगा।”
  • “सर्वे के लिए ₹500 या ₹1,000 दो।”
  • “नाम सूची में चढ़ाने के लिए पैसा दो।”
  • “किस्त रिलीज़ करवाने के लिए पैसा दो।”
  • “यह नया PMAY ऐप डाउनलोड करो।” (फर्जी ऐप से आपका डेटा चोरी हो सकता है।)

असली प्रक्रिया में कोई भी पेमेंट एजेंट के हाथ में नहीं जाती। Awaas+ सर्वे बिलकुल मुफ़्त है, नाम चेक करना मुफ़्त है, और किस्त DBT से आती है।

महिलाओं को खास खतरा

एजेंट महिलाओं से अक्सर ये झूठ बोलते हैं:

  • “महिला कोटा भर गया है।”
  • “विधवा को घर नहीं मिलता।”
  • “पति का नाम सूची में है तो पत्नी का नहीं मिलेगा।”

तीनों बातें गलत हैं। PMAY-G में बहुत बड़े हिस्से के घर महिलाओं के नाम (अकेले या संयुक्त) पर हैं। महिला मुखिया वाले और विधवा परिवार भी वंचना मानदंड (deprivation criteria) के हिसाब से प्राथमिकता में आ सकते हैं। अगर कोई आपको इन बातों से डराता है, तो समझ जाएँ कि वह फर्जी है।

पात्रता: कौन घर ले सकता है?

पात्रता Awaas+ सर्वे और SECC 2011 डेटा पर आधारित होती है।

कौन पात्र है

  • बेघर परिवार
  • कच्चे घर वाले परिवार (कच्ची दीवार या छत)
  • SC/ST परिवार
  • महिला मुखिया वाले और विधवा परिवार
  • दिव्यांग सदस्य वाले परिवार
  • वे परिवार जो Awaas+ सर्वे में शामिल हैं

कौन पात्र नहीं है

  • जिनके पास पहले से पक्का घर है
  • सरकारी नौकरी वाले परिवार
  • आयकर देने वाले
  • ₹15,000 महीने से ज़्यादा कमाने वाले परिवार
  • 2.5 एकड़ से ज़्यादा सिंचित ज़मीन वाले
  • मोटराइज़्ड 3 या 4-पहिया वाहन वाले परिवार
  • किसान क्रेडिट कार्ड (₹50,000 या उससे ज़्यादा लिमिट) वाले परिवार

Awaas+ सिस्टम इन परिवारों को खुद फ़िल्टर कर देता है। कोई एजेंट इस फ़िल्टर को बायपास नहीं कर सकता।

वंचना मानदंड (Deprivation Criteria) क्या है?

आपके घर की हालत के हिसाब से प्राथमिकता मिलती है, जैसे कच्चा घर, बेघर होना या कमरों की संख्या। जिनकी हालत ज़्यादा खराब है, उन्हें पहले मौका मिलता है।

ज़रूरी दस्तावेज़

Awaas+ सर्वे के समय आम तौर पर ये दस्तावेज़ चाहिए होते हैं। इनके लिए किसी एजेंट को पैसा देने की ज़रूरत नहीं है।

  • आधार कार्ड
  • बैंक पासबुक (आधार-लिंक्ड खाता, DBT के लिए ज़रूरी)
  • मनरेगा जॉब कार्ड (अगर है)
  • राशन कार्ड
  • जाति प्रमाण पत्र (SC/ST/OBC के लिए, अगर लागू हो)
  • पासपोर्ट साइज़ फोटो

Awaas+ सर्वे: असली प्रक्रिया

PMAY-ग्रामीण में “अप्लाई” का कोई पैसे वाला बटन या एजेंट वाला रास्ता नहीं है। घर पाने का पहला कदम Awaas+ सर्वे है, और यह दो तरह से हो सकता है।

तरीका 1: ग्राम पंचायत सर्वेयर के ज़रिए

  1. सर्वेयर आपके घर आता है।
  2. आधार e-KYC और फेस ऑथेंटिकेशन करता है।
  3. घर की जियो-टैग्ड फोटो लेता है।
  4. परिवार की जानकारी दर्ज करता है।

इस पूरे काम के लिए आपको कोई पैसा नहीं देना है।

तरीका 2: Awaas+ ऐप से खुद सर्वे

  1. Play Store से Awaas+ 2024 ऐप डाउनलोड करें।
  2. कैमरा और लोकेशन की अनुमति दें।
  3. आधार नंबर डालें और फेस ऑथेंटिकेशन पूरा करें।
  4. राज्य, ज़िला, ब्लॉक और पंचायत चुनें।
  5. “Add/Edit Survey” पर क्लिक करें।
  6. परिवार के मुखिया और परिवार के सदस्यों की जानकारी भरें।
  7. परिवार में से लाभार्थी चुनें।
  8. घर की और प्रस्तावित जगह की जियो-टैग्ड फोटो लें।
  9. सर्वे सबमिट करें।

ऐप में एरर आए तो क्या करें?

  • फेस स्कैन फेल हो: अच्छी रोशनी में दोबारा कोशिश करें और चेहरा चश्मे या कपड़े से न ढकें।
  • फोटो अपलोड न हो: इंटरनेट कनेक्शन चेक करें, या डेटा सेव करके बाद में अपलोड करें।
  • सर्वे सबमिट न हो: ऐप को बंद करके दोबारा खोलें और फिर कोशिश करें।

पैसा कैसे मिलता है?

सर्वे के बाद ग्राम सभा सत्यापन होता है, और सत्यापित सूची के आधार पर लाभार्थी चुने जाते हैं। सहायता राशि मैदानी क्षेत्रों में ₹1.20 लाख और पहाड़ी/पूर्वोत्तर क्षेत्रों में ₹1.30 लाख है।

यह राशि कई किस्तों में आती है, और हर किस्त घर के निर्माण का चरण पूरा होने पर (फोटो और जियो-टैगिंग के साथ) जारी होती है। अगर अगला चरण पूरा नहीं हुआ, तो अगली किस्त नहीं आएगी, चाहे कोई एजेंट कुछ भी कहे। पैसा सीधे बैंक खाते में DBT से आता है।

DBT (Direct Benefit Transfer) का मतलब है कि पैसा सीधे आपके बैंक खाते में आता है, किसी एजेंट के हाथ से नहीं।

मनरेगा और स्वच्छ भारत का फायदा

  • मनरेगा के तहत घर बनाने के लिए अकुशल मज़दूरी के दिन मिलते हैं।
  • स्वच्छ भारत मिशन से शौचालय के लिए ₹12,000 अलग से मिलते हैं।

अपना नाम खुद कैसे चेक करें

फर्जी एजेंट इसलिए कामयाब होते हैं क्योंकि लोग अपना नाम खुद चेक नहीं करते। नाम सूची में न होना अंतिम अस्वीकृति नहीं है। इसका मतलब हो सकता है कि आपका केस अभी ग्राम सभा सत्यापन तक नहीं पहुँचा, या डेटा में कोई गलती है।

तरीका 1: गाँव-वार सूची

  1. pmayg.dord.gov.in खोलें।
  2. Awassoft पर क्लिक करें।
  3. Reports में जाएँ, फिर Social Audit Reports चुनें।
  4. Beneficiary Details for Verification खोलें।
  5. राज्य, ज़िला, ब्लॉक और ग्राम पंचायत चुनें।
  6. सूची में अपना नाम ढूँढें।

तरीका 2: रजिस्ट्रेशन नंबर से

  1. pmayg.dord.gov.in खोलें।
  2. Stakeholders में जाएँ और IAY/PMAYG Beneficiary चुनें।
  3. रजिस्ट्रेशन नंबर डालें।
  4. आपको स्टेटस दिख जाएगा।

ग्राम सभा की सूची

पंचायत भवन में भी सूची लगी होती है। वहाँ जाकर अपना नाम खुद देख सकते हैं।

अगर नाम नहीं है तो क्या करें?

हो सकता है आपका नाम परमानेंट वेट लिस्ट (PWL) में न हो। PWL अनुमोदित लोगों की अंतिम सूची होती है। ग्राम पंचायत या BDO ऑफिस जाकर लिखित आवेदन दें: “मेरा Awaas+ सर्वे हो चुका है, कृपया PWL स्टेटस बताएँ।” आवेदन की रसीद ज़रूर लें।

शिकायत कहाँ करें?

समस्याक्या करें
नाम सूची में नहींग्राम सभा सूची और Social Audit Report चेक करें, फिर ग्राम पंचायत/BDO को लिखित आवेदन दें
किस्त अटकीBDO ऑफिस में लिखित शिकायत दें, फिर CPGRAMS (pgportal.gov.in) पर शिकायत दर्ज करें
एजेंट पैसा माँग रहाBDO को लिखित शिकायत दें और पुलिस या भ्रष्टाचार-निरोधक विभाग को रिपोर्ट करें
सर्वे नहीं हुआAwaas+ ऐप से खुद सर्वे करें

एस्केलेशन का रास्ता

  1. ग्राम पंचायत: लिखित शिकायत दें और रसीद लें।
  2. BDO (खंड विकास अधिकारी): ब्लॉक स्तर पर शिकायत दें।
  3. CPGRAMS (pgportal.gov.in): ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें और शिकायत नंबर सेव रखें।
  4. RTI: अगर जवाब न मिले, तो फाइल स्टेटस और पेमेंट रिकॉर्ड RTI से माँगें।

हर स्तर पर लिखित सबूत रखें। जुबानी शिकायत का कोई रिकॉर्ड नहीं होता। अगर किसी ने ऑनलाइन धोखाधड़ी की हो, तो साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर भी संपर्क कर सकते हैं।

सरकारी शब्दों की आसान भाषा

शब्दमतलब
वंचना मानदंड (Deprivation Criteria)घर की हालत के हिसाब से प्राथमिकता, जैसे कच्चा घर, बेघर या कमरों की संख्या
परमानेंट वेट लिस्ट (PWL)अनुमोदित लोगों की अंतिम सूची
SECC 20112011 की सामाजिक-आर्थिक जनगणना, जिसमें परिवारों का डेटा है
जियो-टैगिंगघर की फोटो GPS लोकेशन के साथ अपलोड करना
DBTDirect Benefit Transfer, पैसा सीधे बैंक खाते में

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

PMAY-ग्रामीण में अप्लाई कैसे करें?
सीधे अप्लाई नहीं होता। Awaas+ सर्वे (ग्राम पंचायत सर्वेयर या सेल्फ-सर्वे ऐप) के ज़रिए नाम आता है। सर्वे बिलकुल मुफ़्त है।

क्या रजिस्ट्रेशन या सर्वे के लिए पैसा लगता है?
नहीं। सर्वे और नाम चेक दोनों मुफ़्त हैं। जो पैसा माँगे, वह फर्जी है।

कितना पैसा मिलता है?
मैदानी क्षेत्रों में ₹1.20 लाख और पहाड़ी/पूर्वोत्तर क्षेत्रों में ₹1.30 लाख। पैसा कई किस्तों में DBT से आता है।

क्या एजेंट घर दिलवा सकता है?
नहीं। घर सिर्फ़ Awaas+ सर्वे, ग्राम सभा सत्यापन और DBT से मिलता है।

क्या सरकारी नौकरी वाले परिवार ले सकते हैं?
नहीं। सरकारी कर्मचारी के परिवार पात्र नहीं हैं।

ग्राम सभा सत्यापन क्या है?
सर्वे के बाद ग्राम सभा लाभार्थी सूची की जाँच करती है। यह अंतिम पात्रता जाँच का हिस्सा है।

एजेंट ने पैसा ले लिया, अब क्या करें?
BDO को लिखित शिकायत दें, CPGRAMS पर शिकायत दर्ज करें और पुलिस में रिपोर्ट करें।

किस्त नहीं आई, कहाँ शिकायत करें?
पहले BDO ऑफिस में लिखित शिकायत दें। जवाब न मिले तो CPGRAMS (pgportal.gov.in) पर शिकायत दर्ज करें और शिकायत नंबर सेव रखें। फिर भी कार्रवाई न हो तो RTI से पेमेंट रिकॉर्ड माँगें।

सर्वे में नाम है लेकिन पैसा नहीं आया, क्या करें?
दो चीज़ें चेक करें। पहली, बैंक खाता आधार से लिंक्ड है या नहीं। दूसरी, निर्माण का चरण पूरा हुआ है या नहीं और जियो-टैगिंग हो चुकी है या नहीं। अगर दोनों ठीक हैं, तो BDO ऑफिस से FTO (Fund Transfer Order) स्टेटस पूछें।

आखिरी बात: आपको किसी एजेंट की ज़रूरत नहीं

PMAY-ग्रामीण आपका हक़ है, किसी की मेहरबानी नहीं। इस योजना में कोई सेटिंग नहीं चलती, और कोई एजेंट आपकी जगह घर नहीं दिलवा सकता।

आज ही ये 3 काम करें

  1. अपना नाम pmayg.dord.gov.in पर चेक करें।
  2. पंचायत भवन में लगी ग्राम सभा सूची में अपना नाम देखें।
  3. अगर कोई पैसा माँगे, तो BDO को लिखित शिकायत दें और CPGRAMS पर रिपोर्ट करें।

हेल्पलाइन: 1800-11-6446
ईमेल: support-pmayg@gov.in

अगर आपके गाँव में कोई पैसा माँग रहा है, तो यह लेख उसे ज़रूर दिखाएँ। सही जानकारी ही सबसे बड़ा बचाव है।

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