PMAY-G फ्रॉड अलर्ट: फर्जी वेबसाइटें और जालसाज कैसे बचें

सितम्बर 28, 2026
Written By Ali Akbar

PMAY-Gramin क्या है?

इस लेख में आप जानेंगे PMAY-G के नाम पर होने वाली आम धोखाधड़ी और उनसे बचने के आसान उपाय। PMAY-Gramin, पुरानी इंदिरा आवास योजना की जगह 2016 में शुरू हुई थी। इसका मकसद सरल है: हर उस परिवार को पक्का घर देना जो कच्चे घर में रहता है, या जिसके पास घर ही नहीं है।

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पात्रता मानदंड: कौन ले सकता है

PMAY-Gramin उन परिवारों के लिए है जो SECC 2011 या आवास+ सर्वे में पात्र पाए गए हैं।

पात्र कौन है:

  • बिना घर वाले परिवार
  • कच्चे घर में रहने वाले — जिनकी छत या दीवार कच्ची है
  • SC/ST परिवारों को प्राथमिकता (60% लक्ष्य आरक्षित)
  • विधवाएं, दिव्यांग, और अल्पसंख्यक परिवार
  • भूमिहीन लाभार्थी — लेकिन भूमि आवंटन मिलना चाहिए

कौन पात्र नहीं है:

  • पक्के घर वाले
  • सरकारी कर्मचारी वाले परिवार
  • आयकर देने वाले
  • ₹15,000/माह से ज़्यादा कमाने वाले
  • चार-पहिया वाहन या मशीनीकृत कृषि उपकरण वाले

आवास+ 2024 सर्वे में नए नियम: आय सीमा अब ₹15,000/माह है (पहले ₹10,000 थी)। दोपहिया वाहन या फ्रिज होने से अब अयोग्य नहीं ठहराया जाता। नाम आवास+ सर्वे में न आया हो तो ग्राम पंचायत से संपर्क करो।

आवश्यक दस्तावेज़

  • आधार कार्ड — ई-केवाईसी और पहचान के लिए
  • बैंक पासबुक — आधार-लिंक्ड (DBT के लिए)
  • मनरेगा जॉब कार्ड — वेज डेज़ क्लेम करने के लिए
  • जाति प्रमाण पत्र — SC/ST के लिए
  • आय प्रमाण पत्र — आय सत्यापित करने के लिए

कोई एजेंट दस्तावेज़ के पैसे मांगे तो यह धोखाधड़ी है — आधार केंद्र या ग्राम पंचायत से मुफ्त बनवाएँ।

आवास+ सर्वे: पंजीकरण कैसे होता है

सीधा ऑनलाइन आवेदन फॉर्म नहीं है — सर्वे के ज़रिए ही नाम सूची में आता है।

ग्राम पंचायत के ज़रिए: सर्वेयर गांव में आएगा, घर की जियो-टैग्ड फोटो लेगा, परिवार का विवरण और आधार ई-केवाईसी करेगा।

आवास+ ऐप से सेल्फ-सर्वे:

  1. प्ले स्टोर से “आवास+” डाउनलोड करें
  2. कैमरा और लोकेशन अनुमति दें
  3. आधार नंबर डालें, फेस ऑथेंटिकेशन से ई-केवाईसी करें
  4. राज्य → ज़िला → ब्लॉक → पंचायत चुनें
  5. परिवार का विवरण भरें, पुराने घर की फोटो लें
  6. डेटा सबमिट करें

ऐप में एरर आए तो पहले इंटरनेट चेक करें — ऐप ऑफलाइन में भी काम करता है, डेटा बाद में अपलोड होता है। बार-बार क्रैश हो तो सर्वेयर से असिस्टेड सर्वे करवाएँ। सर्वे मुफ्त है।

पैसा कैसे मिलेगा

सर्वे के बाद ग्राम सभा सत्यापन, फिर स्थायी प्रतीक्षा सूची (PWL) बनती है।

  1. पहली किस्त: ₹40,000–50,000 — स्वीकृति के बाद
  2. दूसरी किस्त: ₹30,000–40,000 — प्लिंथ लेवल फोटो के बाद
  3. तीसरी किस्त: ₹30,000–40,000 — छत लेवल फोटो के बाद

मनरेगा (90-95 वेज डेज़, ~₹18,000) और स्वच्छ भारत शौचालय (₹12,000) मिलाकर कुल ₹1.50 लाख तक बन सकता है। अतिरिक्त पैसा चाहिए तो बैंक से कम ब्याज पर लोन मिल सकता है — सीधे बैंक शाखा से, एजेंट से नहीं।

लाभार्थी सूची में नाम कैसे जांचें

  • पंजीकरण नंबर से: pmayg.dord.gov.in → Stakeholders → IAY/PMAYG Beneficiary → नंबर डालें → कैप्चा भरें → सबमिट करें।
  • नंबर न हो तो: pmayg.dord.gov.in → AwaasSoft → Report → Social Audit Reports → Beneficiary details for verification → राज्य/ज़िला/ब्लॉक/पंचायत/वर्ष चुनें → पूरी सूची खुल जाएगी।
  • नाम न मिले तो घबराएँ नहीं — पहले ग्राम पंचायत से पुष्टि करें, फिर लिखित शिकायत (रसीद सहित), 30 दिन बाद BDO को, फिर RTI। सूची देखना मुफ्त है।

2026 के नए अपडेट

  • दोपहिया/फ्रिज से अब अयोग्य नहीं होते; आय सीमा ₹15,000/माह
  • अतिरिक्त 2 करोड़ घर स्वीकृत — कुल लक्ष्य अब 4.95 करोड़, 2029 तक पूरा होगा
  • नई PWL कई ज़िलों में प्रकाशित हो रही है — नाम गलत/गायब हो तो आपत्ति दर्ज करें
  • महिला के नाम पर घर बनाना प्राथमिकता

धोखाधड़ी से कैसे बचें

आम तरीके: फ़र्ज़ी पंजीकरण शुल्क, नकली वेबसाइट, व्हाट्सएप स्कैम, नकली ऐप।

असली वेबसाइट .gov.in से खत्म होती है (जैसे pmayg.dord.gov.in) — pmayg.dord.gov.in ही असली है, कभी पैसा नहीं मांगती।

धोखाधड़ी हो जाए तो: cybercrime.gov.in पर शिकायत करें, थाने में FIR करें, बैंक को तुरंत सूचित करें, सारे प्रमाण सुरक्षित रखें। अगर गलत रिपोर्ट की शिकायत करनी हो, तो shikayat darj karne ka poora tarika yahan पढ़ें

गोल्डन रूल: सरकार कभी पैसा नहीं मांगती।

फर्जी वेबसाइट और ऐप की पहचान कैसे करें

जालसाजों की वेबसाइटें देखने में बिल्कुल असली लग सकती हैं — वही रंग, वही लोगो, वही भाषा। लेकिन कुछ निशानियाँ हैं जिनसे नकली साइट तुरंत पकड़ी जाती है। सबसे पहला नियम: असली सरकारी वेबसाइट का पता हमेशा .gov.in पर खत्म होता है। PMAY-G की असली वेबसाइट pmayg.dord.gov.in है। अगर पता .com, .org, .net पर खत्म हो रहा है, या उसमें pmayg के साथ कोई अतिरिक्त शब्द जुड़ा है, तो वह साइट सरकारी नहीं है।

दूसरी निशानी: पैसों की माँग। असली पोर्टल कभी पंजीकरण शुल्क, सर्वे शुल्क या किस्त जारी करने के नाम पर पैसा नहीं माँगता। जिस साइट या व्यक्ति ने पहले पैसा माँगा, समझ लीजिए वही धोखाधड़ी है। तीसरी निशानी: व्हाट्सऐप या टेलीग्राम पर आया फॉर्म। सरकार PMAY-G का आवेदन व्हाट्सऐप पर नहीं माँगती — ऐसा कोई भी मैसेज जिसमें लिंक के साथ फॉर्म भरने को कहा जाए, उसे बिना खोले डिलीट करें।

ऐप के मामले में भी यही सावधानी रखें। “आवास+” सिर्फ आधिकारिक प्ले स्टोर से डाउनलोड करें और डेवलपर का नाम जाँचें — मिलते-जुलते नाम वाले नकली ऐप असली जैसे दिखते हैं। ऐप इंस्टॉल करने से पहले उसकी रेटिंग और रिव्यू देखें, और ऐप को कभी भी बैंक का OTP, पिन या पासवर्ड न बताएँ। HTTPS का ताला-निशान भी गारंटी नहीं है — नकली साइटों पर भी HTTPS होता है, इसलिए सिर्फ ताले को देखकर भरोसा न करें।

धोखाधड़ी हो जाए तो तुरंत ये 5 कदम उठाएँ

अगर गलती से पैसा चला गया है या जानकारी साझा हो गई है, तो घबराएँ नहीं — तेज़ कार्रवाई से नुकसान कम किया जा सकता है। पहला कदम: तुरंत अपने बैंक को सूचित करें और खाता या कार्ड को फ्रीज़ करवाएँ, ताकि और पैसा न निकल सके। दूसरा कदम: राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें और cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें — जितनी जल्दी शिकायत होगी, पैसे वापस मिलने की संभावना उतनी ज़्यादा होगी।

तीसरा कदम: नज़दीकी थाने में FIR दर्ज करवाएँ और शिकायत की कॉपी सँभालकर रखें। चौथा कदम: सारे सबूत सुरक्षित करें — जालसाज का मोबाइल नंबर, UPI ID, बैंक खाता नंबर, चैट के स्क्रीनशॉट और भुगतान की रसीद। सबूत मिटाएँ नहीं, क्योंकि जाँच में यही काम आएँगे। पाँचवाँ कदम: pgportal.gov.in (CPGRAMS) पर भी शिकायत दर्ज करें, ताकि संबंधित विभाग तक मामला पहुँचे। इन पाँचों कदमों में देरी करना जालसाज के पक्ष में जाता है, इसलिए पहला घंटा सबसे कीमती होता है।

फ्रॉड से जुड़े आम सवाल

क्या PMAY-G के लिए कोई फीस लगती है?

नहीं। सर्वे, पंजीकरण, सूची में नाम और किस्त — पूरी प्रक्रिया मुफ्त है। जो भी व्यक्ति या वेबसाइट किसी भी चरण के लिए पैसा माँगे, वह धोखाधड़ी कर रहा है।

कोई व्यक्ति खुद को अधिकारी बताकर फोन करे तो क्या करें?

किसी भी अनजान कॉलर को OTP, पिन, पासवर्ड या बैंक विवरण कभी न बताएँ — असली अधिकारी ये जानकारी फोन पर कभी नहीं माँगता। कॉलर का नाम और नंबर नोट करें, कॉल काटें, और आधिकारिक हेल्पलाइन 1800-11-6446 पर खुद कॉल करके सत्यापित करें।

फर्जी ऐप गलती से डाउनलोड हो जाए तो क्या करें?

ऐप को तुरंत अनइंस्टॉल करें, बैंक खाते की हाल की लेन-देन जाँचें, और अपने बैंक व ईमेल के पासवर्ड बदलें। अगर ऐप ने कोई अनुमति ली थी या पैसा माँगा था, तो cybercrime.gov.in पर शिकायत ज़रूर दर्ज करें।

हेल्पलाइन

  • PMAY-G हेल्पलाइन: 1800-11-6446 / 1800-11-8111
  • ईमेल: support-pmayg@gov.in
  • साइबर क्राइम: cybercrime.gov.in
  • शिकायत पोर्टल: pgportal.gov.in

नकली साइटों से बचने के लिए यह भी जान लें कि पुराना pmayg.nic.in पता अब क्यों नहीं खुलता और असली नया पता कौन सा है: PMAY-G नई आधिकारिक वेबसाइट pmayg.dord.gov.in: पुराना pmayg.nic.in क्यों नहीं खुल रहा? (2026)

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