PMAY-G महिला लाभार्थी की मृत्यु के बाद घर का हक़ आम तौर पर उसके पति या वारिस (कानूनी उत्तराधिकारी) को मिलता है, लेकिन इसके लिए ग्राम सभा का प्रस्ताव और ज़रूरी दस्तावेज़ ब्लॉक कार्यालय में जमा करने पड़ते हैं। इस लेख में आसान भाषा में बताया गया है कि कौन-से दस्तावेज़ लगते हैं, प्रक्रिया क्या है और कहां शिकायत करनी है।
नोट: प्रक्रिया और कागज़ात की शर्तें राज्य के हिसाब से थोड़ी अलग हो सकती हैं। अंतिम जानकारी के लिए अपने BDO कार्यालय या ग्राम पंचायत से ज़रूर पुष्टि कर लें।
PMAY-ग्रामीण क्या है?
PMAY-ग्रामीण एक सरकारी योजना है जो 1 अप्रैल 2016 से चल रही है। इससे पहले इसे इंदिरा आवास योजना (IAY) कहा जाता था। इसे ग्रामीण विकास मंत्रालय (Ministry of Rural Development) चलाता है। इसका मकसद ग्रामीण इलाकों में गरीब परिवारों को बुनियादी सुविधाओं के साथ पक्का घर देना है। योजना को मार्च 2029 तक बढ़ाया गया है।
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कितनी मदद मिलती है
- सामान्य (मैदानी) क्षेत्र में घर बनाने के लिए ₹1.20 लाख और पहाड़ी/मुश्किल इलाकों में ₹1.30 लाख।
- शौचालय के लिए स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) से ₹12,000, जिसका अलग से क्लेम करना पड़ता है।
- घर बनाने में 90–95 दिन की मज़दूरी मनरेगा (MGNREGA) के तहत मिलती है, जिसके लिए जॉब कार्ड ज़रूरी है।
पैसा कैसे आता है
पैसा एक साथ नहीं आता। यह किस्तों में, निर्माण के अलग-अलग चरण के हिसाब से आता है। हर चरण पर AwaasApp से जियो-टैग्ड फोटो अपलोड करनी होती है। पैसा DBT के ज़रिए सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में जाता है, इसलिए बैंक खाता आधार से लिंक (NPCI मैपिंग) होना ज़रूरी है।
PMAY-G का लाभ कौन ले सकता है
पात्र परिवार
- जिनके पास घर नहीं है (बेघर परिवार)।
- जिनका घर कच्चा है और मिट्टी या कच्चे सामान से बना है।
- जो SECC 2011 या Awaas Plus सर्वे में शामिल हैं।
- SC/ST, अल्पसंख्यक, विधवा, दिव्यांग और गरीब परिवारों को प्राथमिकता दी जाती है।
कौन पात्र नहीं है
- जिनके पास पहले से पक्का घर है।
- सरकारी नौकरी करने वाले परिवार।
- इनकम टैक्स देने वाले परिवार।
- जिन्होंने पहले किसी सरकारी आवास योजना का लाभ ले लिया है।
बहिष्करण (exclusion) के और भी नियम होते हैं (जैसे गाड़ी या ज़्यादा ज़मीन), इसलिए अपनी पात्रता ग्राम पंचायत से जांच लें।
PMAY-G में रजिस्ट्रेशन कैसे होता है
PMAY-G के लिए सीधा ऑनलाइन “Apply” फॉर्म नहीं होता। नाम Awaas Plus सर्वे के ज़रिए सूची में आता है। जो कोई ऑनलाइन फॉर्म भरवाने के नाम पर पैसे मांगे, वह गलत है।
ग्राम पंचायत के ज़रिए सर्वे
सर्वेयर घर-घर जाकर AwaasApp से परिवार की जानकारी लेता है। फिर ग्राम सभा में सत्यापन होता है और पात्र नाम प्राथमिकता सूची में आते हैं।
AwaasApp से सेल्फ-सर्वे
अगर आपका सर्वे छूट गया है तो मंत्रालय का आधिकारिक AwaasApp प्ले स्टोर से डाउनलोड करें, मोबाइल नंबर से लॉगिन करें और अपने परिवार, आधार और बैंक की जानकारी भरें। सबमिट करने के बाद ग्राम पंचायत सत्यापन करती है। सत्यापन के बिना नाम सूची में नहीं आता।
AwaasApp में आने वाली आम दिक्कतें
- फेस ऑथेंटिकेशन फेल हो तो अच्छी रोशनी में, चेहरा साफ रखकर सीधे कैमरे में देखें। फिर भी दिक्कत हो तो आधार केंद्र पर बायोमेट्रिक अपडेट करवाएं।
- “Aadhaar already registered” का एरर आए तो ग्राम पंचायत से Awaas Plus ID मांगकर जांचें कि नाम किसी और सर्वे में तो नहीं है।
- सर्वे “pending” दिखाए तो ग्राम पंचायत से सत्यापन के बारे में पूछें।
महिला लाभार्थी की मृत्यु के बाद ज़रूरी दस्तावेज़
सामान्य दस्तावेज़ों (आधार, मनरेगा जॉब कार्ड, आधार-लिंक्ड बैंक पासबुक) के अलावा इन कागज़ातों की ज़रूरत पड़ती है।
मृत्यु प्रमाण पत्र
यह ग्राम पंचायत या संबंधित रजिस्ट्रार कार्यालय से बनता है। इसमें कुछ दिन लग सकते हैं।
वारिस प्रमाण पत्र (Legal Heir Certificate)
यह तहसील के राजस्व कार्यालय से बनता है। आम तौर पर मृत्यु प्रमाण पत्र, परिवार के सदस्यों का आधार और शपथ पत्र (affidavit) लगता है। इसमें पति/पत्नी, बेटे और बेटियों के नाम लिखे होते हैं। बनने का समय और स्टाम्प पेपर की फीस राज्य के हिसाब से अलग होती है।
ग्राम सभा प्रस्ताव (Resolution)
ग्राम पंचायत को लिखित अनुरोध दें कि मृतक लाभार्थी के वारिस के नाम घर आवंटित करने के लिए ग्राम सभा में प्रस्ताव रखा जाए। प्रस्ताव में मृतक का नाम, वारिस का नाम और यह बात साफ लिखी होनी चाहिए कि घर वारिस को दिया जाए। प्रधान और सचिव के हस्ताक्षर होने चाहिए।
संरक्षकता प्रमाण पत्र (अगर बच्चे नाबालिग हैं)
अगर वारिस नाबालिग हैं तो संरक्षकता (guardianship) का प्रमाण चाहिए हो सकता है। इसके लिए बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र, मृत्यु प्रमाण पत्र और संरक्षक का आधार लगता है। इस बारे में तहसील या कोर्ट से पहले पूछ लें कि आपके केस में क्या ज़रूरी है।
ज़रूरी सलाह
सभी दस्तावेज़ों की 2–2 फोटोकॉपी रखें। ब्लॉक कार्यालय में फोटोकॉपी जमा करें और ओरिजिनल अपने पास रखें या सिर्फ सत्यापन के लिए दिखाएं। जमा करने पर रसीद ज़रूर लें।
मृत्यु के बाद घर और पैसे का क्या होगा
जब घर अधूरा हो और कुछ किस्तें मिल चुकी हों
वारिस को बाकी किस्तें मिल सकती हैं। इसके लिए मृत्यु प्रमाण पत्र, वारिस प्रमाण पत्र और ग्राम सभा प्रस्ताव ब्लॉक कार्यालय में जमा करें। ब्लॉक अधिकारी रिकॉर्ड में लाभार्थी का नाम बदलता है, उसके बाद अगली किस्त जारी होती है।
जब निर्माण शुरू ही नहीं हुआ
इस मामले में भी वारिस के नाम पर प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। इसमें क्या होगा, यह राज्य और ज़िले के नियमों पर निर्भर करता है, इसलिए BDO कार्यालय से लिखित में पूछ लें।
जब कोई वारिस नहीं है
अगर कोई वारिस नहीं है तो घर उस लाभार्थी के नाम पर नहीं चलेगा। ग्राम सभा की प्रक्रिया के बाद प्रतीक्षा सूची में अगले पात्र परिवार को घर दिया जा सकता है। नोटिस और आपत्ति की अवधि राज्य और ब्लॉक के हिसाब से तय होती है।
ब्लॉक कार्यालय में क्या करें: स्टेप बाय स्टेप
- मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाएं।
- तहसील से वारिस प्रमाण पत्र बनवाएं।
- ग्राम पंचायत से ग्राम सभा प्रस्ताव बनवाएं।
- ज़रूरत हो तो संरक्षकता प्रमाण पत्र बनवाएं।
- सभी दस्तावेज़ BDO कार्यालय में जमा करें और रसीद लें।
- ब्लॉक अधिकारी रिकॉर्ड में नाम अपडेट करता है, फिर ज़िला और राज्य स्तर की मंज़ूरी के बाद किस्त जारी होती है।
- हर कुछ दिन बाद BDO कार्यालय जाकर फॉलो-अप करें और हर बार लिखित जवाब या रसीद लें।
इस प्रक्रिया में आम तौर पर कुछ हफ्तों से कुछ महीने लग सकते हैं, जो दस्तावेज़ों और स्थानीय प्रक्रिया पर निर्भर करता है।
लाभार्थी सूची में नाम और स्टेटस कैसे जांचें
- pmayg.dord.gov.in खोलें।
- “Stakeholders” में IAY/PMAY-G Beneficiary वाला विकल्प चुनें।
- राज्य, ज़िला, ब्लॉक और पंचायत चुनें।
- रजिस्ट्रेशन नंबर या आधार से स्टेटस देखें।
अगर नाम नहीं मिलता तो ग्राम पंचायत से Awaas Plus सर्वे की जानकारी मांगें। हो सकता है सर्वे में नाम आया ही न हो।
आम समस्याएं और उनके हल
सर्वे हुआ था लेकिन नाम सूची में नहीं आया
ग्राम पंचायत से Awaas Plus ID मांगें। ID होने पर BDO को लिखित आवेदन दें कि नाम सूची में जोड़ा जाए। जवाब न आए तो DRDA (ज़िला ग्रामीण विकास एजेंसी) को आवेदन की कॉपी भेजें।
किस्त नहीं आई
सबसे पहले बैंक में पूछें कि आधार खाते से लिंक (NPCI मैपिंग) है या नहीं। यह सबसे आम वजह होती है। लिंक न हो तो आधार सीडिंग फॉर्म भरें। फिर BDO कार्यालय से पेमेंट दोबारा प्रोसेस करवाने को कहें। जियो-टैग्ड फोटो अपलोड हुई या नहीं, यह भी जांचें।
ग्राम पंचायत या ब्लॉक कार्यालय सहयोग नहीं कर रहा
पहले ग्राम पंचायत सचिव को लिखित आवेदन दें और रसीद लें। कार्रवाई न हो तो BDO को लिखित शिकायत दें, फिर DRDA को। इसके बाद भी हल न हो तो RTI या CPGRAMS (pgportal.gov.in) का इस्तेमाल कर सकते हैं।
कोई एजेंट पैसे मांग रहा है
यह धोखाधड़ी है। PMAY-G बिल्कुल मुफ्त है। कोई भी एजेंट सूची में नाम नहीं डाल सकता, क्योंकि नाम सिर्फ ग्राम सभा की प्रक्रिया और सरकारी रिकॉर्ड से आता है। लिखित शिकायत BDO को दें और हेल्पलाइन पर भी बता दें।
RTI कैसे डालें
RTI में फाइल की नोटिंग, पेमेंट की स्थिति और रिजेक्ट होने की वजह जैसे रिकॉर्ड मांगें। “मुझे घर क्यों नहीं मिला” जैसे सवाल RTI में नहीं पूछे जाते। फीस और फॉर्मेट राज्य के हिसाब से अलग हो सकते हैं, इसलिए अपने राज्य के RTI नियम देख लें।
धोखाधड़ी से कैसे बचें
- PMAY-G के लिए कोई पैसा देने की ज़रूरत नहीं है।
- सिर्फ मंत्रालय का आधिकारिक AwaasApp इस्तेमाल करें। फर्जी ऐप्स से बचें।
- कोई पैसे मांगे तो BDO को लिखित शिकायत दें।
हेल्पलाइन और आधिकारिक जानकारी
- PMAY-G हेल्पलाइन: 1800-11-6446 (टोल-फ्री)
- शिकायत ईमेल: support-pmayg@gov.in
- आधिकारिक पोर्टल: pmayg.dord.gov.in
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
PMAY-G में महिला लाभार्थी की मृत्यु के बाद घर का हक़ किसे मिलेगा?
आम तौर पर पति या वारिस को, ग्राम सभा की मंज़ूरी और ज़रूरी दस्तावेज़ों के बाद।
क्या PMAY-G घर बेटी के नाम हो सकता है?
हां, अगर बेटी वारिस है और ग्राम सभा मंज़ूरी दे। बेटी नाबालिग हो तो संरक्षकता का प्रमाण भी लग सकता है।
वारिस प्रमाण पत्र कहां से बनता है?
तहसील के राजस्व कार्यालय से। इसके लिए मृत्यु प्रमाण पत्र और परिवार के सदस्यों का आधार चाहिए।
अगर महिला के कोई बच्चे नहीं हैं तो घर का क्या होगा?
अगर पति या कोई और वारिस है तो घर उन्हें मिल सकता है। कोई वारिस न हो तो ग्राम सभा की प्रक्रिया के बाद अगले पात्र परिवार को दिया जा सकता है।
क्या नाबालिग बच्चे के नाम पर PMAY-G घर हो सकता है?
नाबालिग बच्चे की तरफ से संरक्षक के ज़रिए प्रक्रिया होती है। ज़रूरी कागज़ातों के लिए तहसील या कोर्ट से पूछ लें।
क्या मृत्यु के बाद किस्त रुक जाती है?
किस्त तब तक रुक सकती है जब तक रिकॉर्ड में वारिस का नाम अपडेट नहीं होता। दस्तावेज़ जमा करने के बाद बाकी किस्तें मिल सकती हैं।
ग्राम सभा प्रस्ताव कैसे बनता है?
ग्राम पंचायत को लिखित अनुरोध दें। ग्राम सभा की बैठक में प्रस्ताव पास होता है और प्रधान व सचिव के हस्ताक्षर के साथ प्रस्ताव मिलता है।
क्या यह प्रक्रिया ऑनलाइन हो सकती है?
नहीं, इस मामले में ब्लॉक कार्यालय में दस्तावेज़ जमा करने पड़ते हैं। ऑनलाइन सिर्फ सूची और स्टेटस देख सकते हैं।
क्या सरकारी नौकरी वाले को PMAY-G मिल सकता है?
नहीं। सरकारी नौकरी वाले परिवार आम तौर पर पात्र नहीं होते।
PMAY-G की किस्त नहीं मिली, कहां शिकायत करें?
पहले बैंक में आधार मैपिंग जांचें, फिर BDO को लिखित शिकायत दें, फिर DRDA को। हेल्पलाइन 1800-11-6446 पर भी संपर्क कर सकते हैं।
निष्कर्ष
अगर आपके परिवार में PMAY-G की महिला लाभार्थी की मृत्यु हो गई है तो देर न करें। मृत्यु प्रमाण पत्र, वारिस प्रमाण पत्र और ग्राम सभा प्रस्ताव (ज़रूरत पर संरक्षकता प्रमाण पत्र) बनवाकर BDO कार्यालय में जमा करें और रसीद लें। हर कुछ दिन बाद फॉलो-अप करते रहें। किसी को पैसे न दें, क्योंकि PMAY-G पूरी तरह मुफ्त है।