PMAY-G में ज़मीन के कागज़ अधूरे हैं? जानिए पूरा समाधान
प्रधानमंत्री आवास योजना – ग्रामीण (PMAY-G) 20 नवंबर 2016 को शुरू हुई थी। इसने इंदिरा आवास योजना (IAY) की जगह ली। यह योजना ग्रामीण विकास मंत्रालय चलाता है और इसका मकसद गाँव के बेघर या कच्चे घर में रहने वाले परिवारों को पक्का घर देना है।
बहुत से लोगों का नाम लिस्ट में होता है, लेकिन ज़मीन के कागज़ अधूरे होते हैं। कहीं ज़मीन बाप-दादा के नाम पर होती है, कहीं पट्टा नहीं होता, और कुछ लोग बिल्कुल भूमिहीन होते हैं। इस लेख में step-by-step बताया गया है कि ऐसी हालत में क्या करना चाहिए।
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PMAY-G की मुख्य जानकारी
| पैरामीटर | विवरण |
|---|---|
| योजना | प्रधानमंत्री आवास योजना – ग्रामीण |
| शुरुआत | 20 नवंबर 2016 |
| मंत्रालय | ग्रामीण विकास मंत्रालय |
| आधिकारिक पोर्टल | pmayg.dord.gov.in |
| मदद (मैदानी क्षेत्र) | ₹1,20,000 |
| मदद (पहाड़ी/कठिन क्षेत्र) | ₹1,30,000 |
| शौचालय के लिए | ₹12,000 (स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण से) |
| वैकल्पिक लोन | ₹70,000 तक |
| घर का न्यूनतम आकार | 25 वर्ग मीटर |
| लक्ष्य (2024-29) | 2 करोड़ अतिरिक्त घर |
| कुल परिव्यय | ₹3,06,137 करोड़ |
PMAY-G पात्रता: कौन ले सकता है घर?
कौन पात्र है?
PMAY-G का लाभ उन्हीं परिवारों को मिलता है जिनका नाम SECC 2011 डेटा या Awaas+ सर्वे में आता है। इनमें ये लोग आते हैं:
- बेघर परिवार, जिनके पास कोई घर नहीं है
- कच्चे या जीर्ण घर में रहने वाले परिवार
- उन परिवारों को प्राथमिकता मिलती है जिनमें SC/ST, अल्पसंख्यक, विधवा या दिव्यांग सदस्य हों
प्राथमिकता का क्रम क्या है?
चयन अभाव (deprivation) के हिसाब से होता है। सबसे पहले बेघर परिवार आते हैं, फिर कच्चे घर वाले। जितने कम कमरे हों, उतनी ज़्यादा प्राथमिकता मिलती है।
कौन पात्र नहीं है?
आम तौर पर इन परिवारों को योजना का लाभ नहीं मिलता:
- जिनके पास पक्का घर है
- जिनके पास मोटरचालित तिपहिया या चौपहिया वाहन है
- जिनके पास ₹50,000 या उससे ज़्यादा लिमिट का किसान क्रेडिट कार्ड है
- जिनके परिवार में कोई सरकारी नौकरी में है
- जो इनकम टैक्स या प्रोफेशनल टैक्स देते हैं
- जिनके परिवार की मासिक आय ₹15,000 से ज़्यादा है
नियम और सीमाएँ समय-समय पर बदलते रहते हैं, इसलिए पक्की जानकारी के लिए अपने ब्लॉक ऑफिस (BDO) से confirm कर लें।
ज़रूरी दस्तावेज़
| दस्तावेज़ | कहाँ से मिलेगा |
|---|---|
| आधार कार्ड | आधार सेंटर |
| बैंक पासबुक (आधार से लिंक्ड) | आपका बैंक |
| मनरेगा जॉब कार्ड | ग्राम पंचायत |
| ज़मीन के कागज़ (पट्टा/खसरा/खतौनी) | तहसील या पटवारी/लेखपाल ऑफिस |
| जाति प्रमाण पत्र (अगर लागू हो) | तहसीलदार / SDM ऑफिस |
पट्टा और रजिस्ट्री अलग चीज़ें हैं। पट्टा या खतौनी ज़मीन के मालिक का रिकॉर्ड होता है, जो तहसील से मिलता है। रजिस्ट्री ज़मीन की खरीद-बिक्री का दस्तावेज़ (सेल डीड) होता है, जो सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में होती है।
फ्रॉड से सावधान रहें
PMAY-G में सीधे ऑनलाइन अप्लाई करने का कोई बटन नहीं है। नाम SECC डेटा, Awaas+ सर्वे और ग्राम सभा की मंज़ूरी से जुड़ता है। अगर कोई एजेंट पैसे लेकर नाम लिस्ट में डालने का वादा करे, तो वह फ्रॉड है। किसी को पैसा न दें और सिर्फ़ आधिकारिक ऐप ही डाउनलोड करें।
Awaas+ सर्वे और रजिस्ट्रेशन प्रोसेस
ग्राम पंचायत के ज़रिए सर्वे
- ग्राम पंचायत ऑफिस जाकर सचिव या वार्ड मेंबर से Awaas+ सर्वे के बारे में पूछें।
- सर्वे के दिन घर पर मौजूद रहें।
- सर्वेयर घर की जियो-टैग्ड फोटो लेगा।
- मोबाइल ऐप से फेस ऑथेंटिकेशन होगा।
- पूरा डेटा AwaasSoft पोर्टल पर अपलोड हो जाएगा।
Awaas+ ऐप से सेल्फ-सर्वे
- गूगल प्ले स्टोर से आधिकारिक Awaas+ ऐप डाउनलोड करें।
- मोबाइल नंबर से रजिस्टर करें।
- आधार नंबर डालकर OTP वेरिफाई करें।
- फेस ऑथेंटिकेशन पूरी करें।
- अपने घर की फोटो लें और लोकेशन ऑन रखें।
- परिवार की details भरकर submit करें और रेफरेंस नंबर संभालकर रखें।
अगर ऐप में एरर आए
अगर “Aadhaar not verified” या “Face authentication failed” जैसा एरर आए, तो इसका मतलब यह नहीं कि आप पात्र नहीं हैं। अक्सर इंटरनेट स्लो होता है या आधार मोबाइल नंबर से लिंक नहीं होता।
- आधार को मोबाइल नंबर से लिंक करवाएँ।
- अच्छे नेटवर्क (4G या WiFi) पर try करें।
- फोन रीस्टार्ट करें और ऐप का cache क्लियर करें।
- फिर भी न चले तो BDO ऑफिस या ग्राम पंचायत से असिस्टेड सर्वे करवाएँ।
ग्राम सभा वेरिफिकेशन
सर्वे के बाद ग्राम सभा में लिस्ट की जाँच होती है। यहाँ देखा जाता है कि घर सच में कच्चा है या नहीं और परिवार पात्र है या नहीं। ग्राम सभा के मिनट्स (बयनामा) की कॉपी ज़रूर माँग लें, क्योंकि यह आपका प्रूफ होता है।
ज़मीन के कागज़ नहीं हैं? ये हैं रास्ते
ज़मीन है लेकिन नाम पर नहीं है
अगर ज़मीन बाप-दादा या जॉइंट फैमिली के नाम पर है, तो पहले म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) करवाना पड़ता है।
- तहसील ऑफिस जाकर म्यूटेशन की एप्लीकेशन दें।
- पुराना पट्टा या खतौनी, वंशावली (फैमिली ट्री), आधार और अगर पुराने मालिक की मृत्यु हो चुकी है तो डेथ सर्टिफिकेट साथ रखें।
- परिवार के बाकी सदस्यों का सहमति पत्र (नो-ऑब्जेक्शन एफिडेविट) लगाएँ।
म्यूटेशन में कितना समय लगेगा, यह राज्य और तहसील पर निर्भर करता है, आम तौर पर कुछ हफ़्ते से कुछ महीने। म्यूटेशन के बिना आपकी एप्लीकेशन आगे नहीं बढ़ पाती।
ज़मीन बिल्कुल नहीं है (भूमिहीन)
PMAY-G में भूमिहीन परिवारों को प्राथमिकता दी जाती है। ऐसे परिवार BDO ऑफिस में लिखित एप्लीकेशन देकर बता सकते हैं कि उनके पास ज़मीन नहीं है और घर के लिए प्लॉट चाहिए।
कई राज्यों में ज़मीन खरीदने या सरकारी ज़मीन देने की अलग योजनाएँ हैं। उदाहरण के लिए, बिहार में मुख्यमंत्री आवास स्थल क्रय सहायता योजना और ओडिशा में वासुंधरा योजना। आपके राज्य में कौन सी योजना चल रही है और कितनी मदद मिलती है, यह BDO या जिला ऑफिस से ज़रूर पूछें।
ज़मीन पर विवाद (डिस्प्यूट) है
अगर ज़मीन पर परिवार या किसी और का दावा है, तो पहले उसे आपसी सहमति, लोक अदालत या कोर्ट के ज़रिए सुलझाना होगा। विवाद खत्म हुए बिना घर की
मंज़ूरी मिलना मुश्किल है। विवादित प्लॉट के बारे में पूरी गाइड यहाँ पढ़ें: PMAY-G ज़मीन विवाद
कोई कागज़ नहीं है
ऐसी हालत में सबसे पहले पटवारी या लेखपाल से ज़मीन का रिकॉर्ड निकलवाएँ। फिर ग्राम पंचायत से कब्ज़े का प्रमाण पत्र या NOC लें और तहसीलदार से बात करके देखें कि आपके राज्य में कौन सा कागज़ मान्य है।
घर बनाने और पैसा मिलने की प्रक्रिया
मैदानी और पहाड़ी इलाकों में फ़र्क क्यों?
मैदानी इलाकों में ₹1,20,000 और पहाड़ी, कठिन और LWE-प्रभावित इलाकों में ₹1,30,000 मिलते हैं। पहाड़ी इलाकों में सीमेंट, ईंट और सरिया गाँव तक पहुँचाना महँगा पड़ता है, इसलिए वहाँ ज़्यादा मदद दी जाती है।
किस्त कैसे आती है?
पैसा सीधे बैंक खाते में (DBT) कई किस्तों में आता है। कितनी किस्तें और किस स्टेज पर मिलेंगी, यह राज्य के नियम के हिसाब से अलग हो सकता है। आम तौर पर ये स्टेज होती हैं:
- मंज़ूरी (sanction) के बाद पहली किस्त
- नींव (foundation) या प्लिंथ के बाद दूसरी किस्त
- लिंटल लेवल के बाद तीसरी किस्त
- घर पूरा होने और जियो-टैग फोटो अपलोड होने पर आखिरी किस्त
घर बनाने के दौरान मनरेगा के तहत 90 से 95 दिन की मज़दूरी भी मिल सकती है। शौचालय के लिए अलग से ₹12,000 स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण से मिलते हैं।
किस्त नहीं आ रही? ये कारण हो सकते हैं
- आधार-बैंक लिंक नहीं है: DBT के लिए आधार बैंक खाते से सीड होना ज़रूरी है। बैंक जाकर सीडिंग करवाएँ।
- जियो-टैग फोटो अपलोड नहीं हुई: हर स्टेज की फोटो अपलोड होनी चाहिए, वरना अगली किस्त रुक जाती है।
- जॉब कार्ड इनएक्टिव है: ब्लॉक ऑफिस से जॉब कार्ड की स्थिति चेक करवाएँ।
- FTO पेंडिंग है: AwaasSoft पर FTO ट्रैकिंग देखें। कभी-कभी फंड रिलीज़ का इंतज़ार भी होता है।
बेनेफिशरी लिस्ट में अपना नाम कैसे देखें?
pmayg.dord.gov.in पर
- pmayg.dord.gov.in खोलकर AwaasSoft सेक्शन में जाएँ।
- Report ऑप्शन चुनें।
- Social Audit Reports में “Beneficiary details for verification” पर क्लिक करें।
- State, District, Block और Panchayat सेलेक्ट करें।
- स्कीम के रूप में प्रधानमंत्री आवास योजना चुनें, कैप्चा भरें और submit करें।
Awaas Sakhi ऐप से
Awaas Sakhi ऐप में “Wait List” में आप देख सकते हैं कि नाम वेटिंग लिस्ट में है या नहीं। “Track My House” से घर की मंज़ूरी और प्रोग्रेस देख सकते हैं।
आम समस्याएँ और उनके हल
नाम लिस्ट में नहीं है
अगर नाम SECC 2011 लिस्ट में नहीं है, तो Awaas+ ऐप से सेल्फ-सर्वे करें या BDO ऑफिस में इन्क्लूज़न के लिए लिखित एप्लीकेशन दें।
किस्त नहीं मिली
पहले AwaasSoft पर पेमेंट स्टेटस और FTO चेक करें। फिर BDO ऑफिस में लिखित शिकायत दें और बैंक से DBT ट्रांज़ैक्शन स्टेटस पता करें।
ग्राम पंचायत सहयोग नहीं कर रही
BDO को लिखित शिकायत दें। वहाँ सुनवाई न हो तो DRDA या जिला अधिकारी (DM) ऑफिस में अपील करें।
शिकायत कहाँ करें?
PMAY-G में शिकायत निवारण की व्यवस्था ग्राम पंचायत, ब्लॉक, ज़िला और राज्य स्तर पर है। पहले BDO ऑफिस में लिखित शिकायत दें। वहाँ हल न मिले तो ऑनलाइन शिकायत भी कर सकते हैं।
| सेवा | संपर्क |
|---|---|
| PMAY-G हेल्पलाइन | 1800-11-6446 / 1800-11-8111 |
| ईमेल | support-pmayg@gov.in |
| CPGRAMS | pgportal.gov.in |
| आधिकारिक पोर्टल | pmayg.dord.gov.in |
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या PMAY-G में सीधे ऑनलाइन अप्लाई कर सकते हैं?
नहीं। नाम SECC 2011 डेटा, Awaas+ सर्वे और ग्राम सभा की मंज़ूरी के ज़रिए जुड़ता है। Awaas+ ऐप से आप सिर्फ़ सेल्फ-सर्वे कर सकते हैं।
ज़मीन का पट्टा नहीं है तो क्या करें?
अगर ज़मीन किसी और के नाम पर है तो तहसील ऑफिस में म्यूटेशन करवाएँ। अगर आप भूमिहीन हैं तो BDO ऑफिस में ज़मीन के लिए लिखित एप्लीकेशन दें और अपने राज्य की ज़मीन योजना के बारे में पूछें।
क्या सरकारी कर्मचारी के परिवार को PMAY-G मिलता है?
नहीं। परिवार में किसी के सरकारी नौकरी में होने पर आम तौर पर योजना का लाभ नहीं मिलता।
क्या विधवा या दिव्यांग को प्राथमिकता मिलती है?
हाँ। विधवा, दिव्यांग, SC/ST और अल्पसंख्यक परिवारों को प्राथमिकता दी जाती है।
सर्वे में नाम है लेकिन पैसा नहीं आया, क्या करें?
सबसे पहले आधार-बैंक सीडिंग चेक करें। फिर BDO से पता करें कि जियो-टैग फोटो अपलोड हुई है या नहीं। दोनों ठीक हों तो AwaasSoft पर FTO स्टेटस देखें और BDO ऑफिस में लिखित शिकायत दें।
किस्त की शिकायत कहाँ करें?
पहले BDO ऑफिस में लिखित शिकायत दें। वहाँ हल न हो तो CPGRAMS (pgportal.gov.in) पर ऑनलाइन शिकायत करें या support-pmayg@gov.in पर ईमेल भेजें।
निष्कर्ष
PMAY-G गाँव के परिवारों को पक्का घर देने वाली एक ज़रूरी योजना है। अगर आपके ज़मीन के कागज़ अधूरे हैं, तो सबसे पहले तहसील ऑफिस में म्यूटेशन या रिकॉर्ड सुधार की प्रक्रिया शुरू करें। भूमिहीन होने पर BDO और जिला ऑफिस से ज़मीन या राज्य की ज़मीन योजना के बारे में संपर्क करें। किसी भी एजेंट को पैसे न दें, क्योंकि पूरी प्रक्रिया सरकारी और मुफ़्त है।